भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट के बीच भी बढ़ाया क्रूड आयात
होर्मुज पर जड़ा ताला और खाड़ी देशों पर गिरती मिसाइलें, फिर भी भारत ने मंगाया करोड़ों टन क्रूड, पलक झपकते नया रूट तैयार
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भारत ने ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बावजूद अप्रैल में प्रतिदिन 44 लाख बैरल क्रूड आयात किया। रूस, सऊदी अरब और यूएई से प्रमुख सप्लाई के कारण भारत ने 2.01 करोड़ मीट्रिक टन क्रूड मंगाया, जबकि आयात लागत 16.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई।
- 01भारत ने अप्रैल में प्रतिदिन 44 लाख बैरल क्रूड आयात किया, जो फरवरी के 50 लाख बैरल से कम है।
- 02रूस से 15.70 लाख बैरल प्रतिदिन क्रूड सप्लाई हुई, जो कुल आयात का 35-40% है।
- 03भारत ने अप्रैल में 2.01 करोड़ मीट्रिक टन क्रूड का आयात किया, जो पिछले साल के 2.10 करोड़ मीट्रिक टन के करीब है।
- 04आयात की कुल लागत 16.3 अरब डॉलर (लगभग 1.56 लाख करोड़ रुपये) रही, जो पिछले साल के 10.7 अरब डॉलर से अधिक है।
- 05भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करते हुए तेल की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है, लेकिन भारत ने इस संकट को अवसर में बदल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बावजूद, भारत ने अप्रैल में प्रतिदिन लगभग 44 लाख बैरल क्रूड आयात किया, जो फरवरी में 50 लाख बैरल था। कुल मिलाकर, भारत ने अप्रैल में 2.01 करोड़ मीट्रिक टन क्रूड का आयात किया। रूस से भारत को 15.70 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला, जो कुल आयात का 35-40% है। सऊदी अरब और यूएई ने भी महत्वपूर्ण मात्रा में तेल की आपूर्ति की। हालांकि, आयात की लागत में वृद्धि हुई है, जो 16.3 अरब डॉलर (लगभग 1.56 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गई। भारत ने होर्मुज को बायपास करते हुए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग किया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि उसकी ऊर्जा आवश्यकताएं बिना किसी रुकावट के पूरी हों।
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भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए यह आयात महत्वपूर्ण है, खासकर जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है।
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