हज का महत्व: काबा, जमजम और कुर्बानी की कहानी
Hajj का इतिहास: काबा, जमजम और कुर्बानी से जुड़ी वह कहानी जो हर मुसलमान को जाननी चाहिए

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हज इस्लाम में केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि यह त्याग, सब्र और अल्लाह की इबादत का प्रतीक है। इसकी शुरुआत हजरत इब्राहीम (अ.स.) और उनके परिवार की कुर्बानी से जुड़ी है, जब अल्लाह ने उन्हें काबा बनाने का आदेश दिया। हज की प्रक्रिया कई महत्वपूर्ण अरकान के माध्यम से अदा की जाती है, जो इस्लामी मान्यताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- 01हज की शुरुआत हजरत इब्राहीम (अ.स.) के समय से मानी जाती है, जब अल्लाह ने उन्हें अपने बेटे इस्माईल (अ.स.) को कुर्बान करने का आदेश दिया था।
- 02कुरान में हज का ऐलान करने का आदेश दिया गया है, जिससे यह यात्रा शुरू होती है।
- 03हज के दौरान सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच दौड़ने की प्रक्रिया, हजरत हाजरा (अ.स.) की कुर्बानी की याद दिलाती है।
- 04कुर्बानी का कार्य हजरत इब्राहीम (अ.स.) की नीयत की याद में किया जाता है, जब अल्लाह ने उनकी जगह एक दुम्बा भेजा।
- 05हज करने वाले व्यक्ति को गुनाहों से बचने पर जन्नत का वादा किया गया है, जैसा कि हदीस में बताया गया है।
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हज इस्लाम में एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है, जो केवल एक मजहबी यात्रा नहीं है, बल्कि यह त्याग, सब्र और अल्लाह की इबादत का प्रतीक है। इसकी शुरुआत हजरत इब्राहीम (अ.स.) और उनकी पत्नी हाजरा (अ.स.) की कुर्बानी से जुड़ी है। कुरान के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहीम (अ.स.) को अपनी पत्नी और बेटे को वीरान रेगिस्तान में छोड़ने का आदेश दिया, जिसके बाद उन्हें काबा की तामीर करने का हुक्म दिया गया। हज की प्रक्रिया में कई अरकान शामिल हैं, जैसे सफा और मरवा के बीच दौड़ना, जो हजरत हाजरा (अ.स.) की कोशिशों की याद दिलाता है। इसके अलावा, हज के दौरान दी जाने वाली कुर्बानी हजरत इब्राहीम (अ.स.) के उस ऐतिहासिक वाकये की याद दिलाती है, जब अल्लाह ने उनकी नीयत को देखकर उनके बेटे की जगह एक दुम्बा भेजा। पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हज के महत्व को बताते हुए कहा है कि जो व्यक्ति अल्लाह की रजा के लिए हज करता है, वह गुनाहों से मुक्त होकर लौटता है।
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