बस्तर में 3 साल बाद लौटेगा पारंपरिक फिश फेस्टिवल, तैयारियां जोरों पर
3 साल बाद बस्तर में लौटेगा पारंपरिक फिश फेस्टिवल, तैयारियां शुरू
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छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में तीन साल बाद 'बंधा मतौर तालाब उत्सव' का आयोजन 23 मई को होगा। कोंडागांव जिले के ग्राम बरकई में होने वाले इस फेस्टिवल में हजारों पर्यटकों के आने की उम्मीद है, जिसमें पारंपरिक मछली पकड़ने की गतिविधियाँ शामिल होंगी।
- 01उत्सव में भाग लेने के लिए प्रति व्यक्ति 200 रुपये का प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया है।
- 02पारंपरिक मछली पकड़ने के औजारों का उपयोग करने पर अलग से मामूली शुल्क लिया जाएगा।
- 03ग्रामीणों के लिए बिना किसी उपकरण के मछली पकड़ने पर प्रवेश निःशुल्क है।
- 04पिछले वर्ष के आयोजन में 1,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया था, इस वर्ष नए रिकॉर्ड की उम्मीद है।
- 05ओडिशा के ग्रामीणों को भी इस उत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
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छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में, कोंडागांव जिले के ग्राम बरकई में तीन साल बाद 'बंधा मतौर तालाब उत्सव' का भव्य आयोजन 23 मई को होने जा रहा है। इस पारंपरिक फिश फेस्टिवल में स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। पिछले वर्ष के आयोजन में एक हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे, जबकि इस वर्ष नए रिकॉर्ड की उम्मीद है। उत्सव का शुभारंभ गांव के मालगुजार द्वारा विशेष पूजा-अर्चना से होता है, जिसके बाद मछलियाँ तालाब के पानी की सतह पर उछलने लगती हैं। इसके बाद, उपस्थित जनसैलाब सामूहिक रूप से मछली पकड़ने में शामिल हो जाता है। इस बार, आयोजन समिति ने प्रवेश शुल्क 200 रुपये निर्धारित किया है, जबकि पारंपरिक औजारों के उपयोग पर अलग से शुल्क लिया जाएगा। ग्रामीण जो बिना उपकरण के मछली पकड़ेंगे, उनके लिए प्रवेश निःशुल्क है। आयोजकों ने पड़ोसी राज्य ओडिशा के ग्रामीणों को भी आमंत्रित किया है, जिससे उत्सव में भागीदारी और बढ़ने की उम्मीद है।
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यह उत्सव स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा और पर्यटन को आकर्षित करेगा।
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