सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को वैध ठहराया
'SIR पूरी तरह से वैध, चुनाव आयोग को इसका अधिकार'; सुप्रीम कोर्ट ने दी क्लीन चिट

Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वैध माना है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुरूप है और इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता। आयोग को यह दायित्व दिया गया है कि वह उन व्यक्तियों को सक्षम प्राधिकारी के पास भेजे जो मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करते।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक माना।
- 02मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने SIR को अवैध नहीं ठहराया।
- 03आयोग को उन व्यक्तियों को सक्षम प्राधिकारी के पास भेजने का दायित्व सौंपा गया है जो आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करते।
- 0411 दस्तावेजों पर विचार करने के बाद अदालत ने आधार कार्ड को शामिल करने की अनुमति दी।
- 05अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का समूह मनमाना नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वैध ठहराया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस प्रक्रिया को केवल इसलिए अवैध नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सामान्य संशोधन प्रक्रिया से भिन्न है। अदालत ने एसआईआर को एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया मानते हुए कहा कि यह कानूनी रूप से मान्य है। इसके साथ ही, अदालत ने 11 दस्तावेजों पर विचार करते हुए आधार कार्ड को शामिल करने की अनुमति दी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आयोग किसी व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करने के मामले में संतुष्ट नहीं है, तो उसे ऐसे व्यक्तियों को केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास भेजने का दायित्व है। इस निर्णय से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और वैधता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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इस निर्णय से बिहार में चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और वैधता बढ़ेगी।
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