गर्मी के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है नकारात्मक असर
Ghaziabad News: गर्मी में बढ़ रहा गुस्सा और चिड़चिड़ापन
Amar Ujala
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गाजियाबाद, भारत में बढ़ती गर्मी लोगों की मानसिक सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। एमएमजी अस्पताल में हर दिन 150 से 200 मरीज मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन के साथ पहुंच रहे हैं, जिसका मुख्य कारण डिहाइड्रेशन, नींद की कमी और तनाव हार्मोन का बढ़ता स्तर है।
- 01गर्मी की बढ़ती तपिश से मानसिक स्वास्थ्य पर असर
- 02एमएमजी अस्पताल में रोजाना 150-200 मरीज पहुंच रहे हैं
- 03डिहाइड्रेशन और नींद की कमी से बढ़ रहा तनाव
- 04मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन आम हो रहा है
- 05विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रेशन और सही खानपान जरूरी है
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गाजियाबाद में गर्मी की बढ़ती तपिश ने लोगों की मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर डालना शुरू कर दिया है। एमएमजी अस्पताल में रोजाना 150 से 200 मरीज मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन के साथ पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे शरीर में बढ़ता तापमान, डिहाइड्रेशन, नींद की कमी और तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन का स्तर बढ़ना है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. साकेत नाथ तिवारी के अनुसार, गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है और थकावट बढ़ती है। इसके अलावा, डिहाइड्रेशन से मूड स्विंग्स भी बढ़ते हैं। डॉ. संतराम वर्मा ने बताया कि गर्मी में पसीने के साथ शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं, जिससे सिरदर्द और थकान होती है। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. चंदा यादव ने बताया कि गर्मियों की उमस भरी रातों में नींद पूरी नहीं होने से दिमाग का इमोशनल कंट्रोल कमजोर हो जाता है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि दिनभर में 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए और हल्का भोजन करना चाहिए।
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गर्मी के कारण मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट से लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
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