चीन के नए नियमों का भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर प्रभाव
भारत के 500 अरब डॉलर इलेक्ट्रॉनिक्स सपने पर चीन के फैसलों का असर?

Image: Business Standard
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के संगठन ICEA ने चीन के नए नियमों के कारण 'चाइना प्लस वन' रणनीति पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता जताई है। चीन के नियमों से भारत में निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में बाधा आ सकती है, जबकि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य है।
- 01ICEA ने चीन के नए नियमों के खिलाफ एक अंतर-मंत्रालयी समूह बनाने की मांग की है।
- 02चीन के नियम कंपनियों के डेटा और सप्लाई चेन पर सख्त नियंत्रण लागू करते हैं।
- 03भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार FY26 में 150 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
- 04भारत से मोबाइल फोन का एक्सपोर्ट FY26 में 29.4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।
- 05एप्पल ने FY26 में भारत से 21 अरब डॉलर से अधिक के iPhone एक्सपोर्ट किए।
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इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के संगठन ICEA ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि चीन के हालिया नियमों के कारण उत्पन्न खतरों का सामना करने के लिए एक बड़ा अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया जाए। ICEA का कहना है कि चीन के नए नियम, जो कंपनियों के डेटा उपयोग और सप्लाई चेन पर सख्त नियंत्रण लगाते हैं, भारत की 'चाइना प्लस वन' रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। यह रणनीति कंपनियों को चीन के अलावा भारत जैसे देशों में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र अब तीसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट सेक्टर बन चुका है, और सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इसके अंतर्गत 200 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट शामिल है। FY26 में मोबाइल फोन उत्पादन 70 अरब डॉलर और एक्सपोर्ट 29.4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जिसमें एप्पल का योगदान महत्वपूर्ण है।
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चीन के नए नियमों के कारण भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश और उत्पादन की गति प्रभावित हो सकती है।
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