उमा भारती के बयान से मध्यप्रदेश की राजनीति में उबाल
MP में फिर गूंजा 'माई का लाल', उमा भारती के बयान से सियासी पारा चढ़ा
Aaj Tak
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पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मध्यप्रदेश के भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान 'माई का लाल' बयान देकर सवर्ण समाज में नाराजगी पैदा की है। उनका यह बयान संभावित सियासी वापसी के संकेत भी दे रहा है, लेकिन इससे सवर्ण कर्मचारियों में गुस्सा है, जो आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
- 01उमा भारती का 'माई का लाल' बयान सवर्ण समाज में नाराजगी का कारण बना।
- 02बयान को उनकी सियासी वापसी के संकेत माना जा रहा है।
- 03सवर्ण कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
- 04यह बयान 2018 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को नुकसान पहुंचाने वाले बयान की पुनरावृत्ति है।
- 05उमा भारती की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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मध्यप्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का 'माई का लाल' बयान फिर से चर्चा का विषय बन गया है। भोपाल की लोधी पंचायत में उन्होंने आरक्षण के समर्थन में कहा कि तब तक कोई 'माई का लाल' आरक्षण नहीं छीन सकता जब तक प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस के बच्चे गरीबों के बच्चों के साथ एक ही स्कूल में नहीं पढ़ते। इस बयान ने सवर्ण समाज में नाराजगी पैदा की है, जिसके चलते मध्यप्रदेश ब्राह्मण अधिकारी कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष अशोक पांडे ने उमा भारती से बयान वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। यह स्थिति सत्तारूढ़ दल के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इसी तरह के एक बयान ने 2018 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को नुकसान पहुंचाया था। हालांकि, कुछ पत्रकारों का मानना है कि उमा भारती का यह बयान एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, क्योंकि वे वर्तमान में किसी पद पर नहीं हैं और चुनावी राजनीति में वापसी की इच्छा जता चुकी हैं।
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उमा भारती के बयान से सवर्ण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है, जो आगामी चुनावों में सत्तारूढ़ दल के लिए चुनौती बन सकता है।
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