दिल्ली के अस्पतालों पर CCI की जांच: मरीजों से अधिक वसूली के आरोप
दिल्ली के बड़े अस्पतालों पर CCI की नजर, मरीजों से ज्यादा वसूली के आरोपों ने बढ़ाई हलचल

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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने दिल्ली के निजी अस्पतालों की जांच के निष्कर्षों को स्वीकार नहीं किया है, जहां मरीजों से दवाओं और अन्य सेवाओं के लिए अधिक कीमत वसूली के आरोप लगे हैं। यह मामला 2015 में एक शिकायत के बाद शुरू हुआ था, जिसमें अस्पतालों पर मिलीभगत का आरोप लगाया गया था।
- 01CCI ने दिल्ली के 12 प्रमुख अस्पतालों की जांच की है, जिसमें मैक्स और फोर्टिस अस्पताल शामिल हैं।
- 02आयोग ने कहा कि अस्पताल मरीजों को एक तरह से 'बंधक उपभोक्ता' बना लेते हैं।
- 032015 में सिरिंज निर्माता और अस्पताल के बीच मिलीभगत की शिकायत के बाद यह जांच शुरू हुई।
- 04CCI ने माना कि कोई कार्टेल व्यवस्था साबित नहीं हुई, लेकिन जांच का दायरा बढ़ाया गया।
- 05अस्पतालों को जवाब देने के लिए भेजे गए ईमेल का कोई उत्तर नहीं मिला।
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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने दिल्ली के निजी अस्पतालों की जांच के निष्कर्षों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। आयोग ने कहा कि सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल केवल इसलिए एकाधिकार के श्रेणी में नहीं आते क्योंकि भर्ती मरीज दवाएं और अन्य उपचार सामग्री उन्हीं अस्पतालों से लेते हैं। हालांकि, आयोग ने यह स्वीकार किया कि अस्पताल मरीजों को एक तरह से 'बंधक उपभोक्ता' बना लेते हैं, जिससे मरीज दवाओं, जांचों और अन्य सुविधाओं के लिए अस्पताल पर निर्भर हो जाते हैं।
इस जांच में दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों जैसे मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, फोर्टिस हॉस्पिटल, और इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल शामिल हैं। यह मामला 2015 में एक शिकायत के बाद शुरू हुआ, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सिरिंज निर्माता बेक्टन डिकिंसन और मैक्स हॉस्पिटल ने ऊंची कीमतों पर सिरिंज बेचने के लिए मिलीभगत की थी। CCI ने बाद में माना कि कोई कार्टेल साबित नहीं हुआ, लेकिन अस्पतालों द्वारा मरीजों से अधिक वसूली के आरोपों की जांच जारी रखी।
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इस जांच का परिणाम मरीजों के लिए अस्पतालों की सेवाओं की लागत में बदलाव ला सकता है, जिससे उन्हें उचित मूल्य पर उपचार प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
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