दिल्ली जिमखाना: अफसरों की ऐश और सार्वजनिक जमीन का किराया
अरबों की जमीन, कौड़ियों में किराया और अफसरों की ऐश... दिल्ली जिमखाना पर सवाल तो उठेंगे ही
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दिल्ली जिमखाना, जो ब्रिटिश राज के दौरान स्थापित हुआ, अब सरकारी अफसरों का ठिकाना बन गया है। यह 27 एकड़ की प्राइम भूमि पर स्थित है, जिसका सालाना किराया मात्र ₹1,000 है। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि कैसे अफसर इस मूल्य पर ऐसी संपत्ति का उपयोग कर सकते हैं।
- 01दिल्ली जिमखाना की स्थापना ब्रिटिश राज के दौरान हुई थी, जिसका उद्देश्य अफसरों के लिए मनोरंजन का स्थान बनाना था।
- 02जिमखाना शब्द का अर्थ है जिम (व्यायाम) और फारसी में 'ख़ाना' (स्थान) का संयोजन।
- 031913 में इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना की गई थी, जहां भारतीयों की एंट्री प्रतिबंधित थी।
- 04आजादी के बाद, जिमखाना अफसरों के नियंत्रण में आ गया, लेकिन आम जनता को इसमें प्रवेश की अनुमति नहीं है।
- 05दिल्ली जिमखाना की 27 एकड़ भूमि का सालाना किराया मात्र ₹1,000 है, जिससे सवाल उठता है कि क्या यह उचित है।
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दिल्ली जिमखाना, जो कि ब्रिटिश राज के दौरान स्थापित हुआ था, अब सरकारी अफसरों का ठिकाना बन गया है। यह जिमखाना 27 एकड़ की प्राइम भूमि पर स्थित है, जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान अफसरों के लिए मनोरंजन का स्थान बनाने के उद्देश्य से बनाया गया था। इसका नाम 'जिम' और फारसी में 'ख़ाना' के संयोजन से आया है। 1913 में स्थापित इस क्लब में भारतीयों की एंट्री प्रतिबंधित थी। आजादी के बाद, यह जिमखाना अफसरों के नियंत्रण में आ गया है, लेकिन आम जनता को इसमें प्रवेश की अनुमति नहीं है। अब इस पर सवाल उठ रहे हैं कि कैसे सरकारी अफसर इस भूमि का उपयोग कर रहे हैं, जबकि उनका सालाना किराया मात्र ₹1,000 है। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे सरकारी संपत्तियों का उपयोग निजी लाभ के लिए किया जा रहा है, जो कि एक गंभीर मुद्दा है।
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दिल्ली जिमखाना की भूमि का किराया और इसके उपयोग पर उठ रहे सवाल स्थानीय प्रशासन और सरकारी नीतियों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
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