भारत में सिजेरियन डिलीवरी की बढ़ती दर: NFHS रिपोर्ट से खुलासा
Normal Vs C-Section: देश में तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं सिजेरियन, NFHS की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
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भारत में सिजेरियन डिलीवरी की दर तेजी से बढ़ रही है, जो अब कुल प्रसव का 27.2 प्रतिशत है। पश्चिम बंगाल में यह दर 87.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सरकारी अस्पतालों में यह दर 16.9 प्रतिशत है, जो कम है और चिंता का विषय है।
- 01भारत में प्राइवेट अस्पतालों में 54 प्रतिशत डिलीवरी सिजेरियन के जरिए हो रही हैं।
- 02पश्चिम बंगाल में सिजेरियन डिलीवरी की दर 87.7 प्रतिशत है, जबकि तेलंगाना में यह 84 प्रतिशत है।
- 032004-05 में सिजेरियन डिलीवरी की दर केवल 8.5 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में 27.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
- 04सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी की दर 16.9 प्रतिशत है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित मानक से कम है।
- 0566.4 प्रतिशत बच्चे अपने परिवार के पहले बच्चे हैं, जबकि चौथे या उससे अधिक बच्चों का जन्म केवल 3.5 प्रतिशत है।
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में सिजेरियन डिलीवरी की दर तेजी से बढ़ रही है। प्राइवेट अस्पतालों में 54 प्रतिशत प्रसव सिजेरियन के जरिए हो रहे हैं, जिसमें पश्चिम बंगाल का आंकड़ा 87.7 प्रतिशत है। पिछले दो दशकों में सिजेरियन डिलीवरी की दर में लगातार वृद्धि हुई है, जो 2004-05 में केवल 8.5 प्रतिशत थी और अब 2023-24 में 27.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों में यह दर 16.9 प्रतिशत है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित मानक से कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम सिजेरियन दर कुछ राज्यों में सुविधाओं की कमी का संकेत है, जिससे मातृ मृत्यु दर भी अधिक हो सकती है। इसके अलावा, 66.4 प्रतिशत बच्चे अपने परिवार के पहले बच्चे हैं, जो स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को जन्म देता है।
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सिजेरियन डिलीवरी की बढ़ती दर स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव डाल रही है, विशेषकर उन राज्यों में जहां सुविधाएं कम हैं।
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