सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में ससुराल पक्ष को घसीटने पर लगाई रोक
'वैवाहिक विवादों में पूरे ससुराल पक्ष को घसीटना गलत', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में सामान्य आरोपों के आधार पर पति के रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को अनुचित ठहराया। कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के पूरे ससुराल पक्ष को मामलों में शामिल नहीं किया जा सकता।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में सामान्य आरोपों पर ससुराल पक्ष को शामिल करना गलत है।
- 02कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिश्तेदारों के खिलाफ आरोपों को ठोस साक्ष्यों द्वारा समर्थित होना चाहिए।
- 03महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में ठोस साक्ष्य की कमी से उन्हें झूठा नहीं माना जा सकता।
- 04कोर्ट ने पति के रिश्तेदारों को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट को मुख्य आरोपों पर मामला जारी रखने का निर्देश दिया।
- 05कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून का दुरुपयोग व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए नहीं होना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में वैवाहिक विवादों में ससुराल पक्ष को घसीटने के खिलाफ महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने मध्य प्रदेश में एक मामले में कहा कि सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर पति के सभी रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी बताया कि रिश्तेदारों के खिलाफ आरोप स्पष्ट और ठोस साक्ष्यों पर आधारित होने चाहिए। इस निर्णय में यह भी उल्लेख किया गया कि महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में साक्ष्य की कमी से पीड़ितों को झूठा नहीं माना जा सकता। हालांकि, यदि पति के रिश्तेदारों की सक्रिय भागीदारी या क्रूरता के खिलाफ ठोस साक्ष्य होते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले में मुख्य आरोप पति पर ही थे, और दोनों पक्षों के तलाक के बाद ससुराल वालों को राहत दी गई।
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यह निर्णय वैवाहिक विवादों में महिलाओं के अधिकारों और ससुराल पक्ष के खिलाफ अनुचित आरोपों की रोकथाम में मदद करेगा।
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