सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: घर में अपराध होने पर परिवार को बताना होगा पीड़ित की मृत्यु का कारण
घर में अपराध होने पर घर वालों को बताना होगा कि पीड़ित की कैसे हुई मौत: सुप्रीम कोर्ट

Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि घर में कोई अपराध होता है, तो घर में रहने वालों को यह बताना होगा कि पीड़ित की मृत्यु कैसे हुई। यह निर्णय गौड़ आचारजी के मामले में आया है, जिसमें उनकी पत्नी सोमा आचारजी की हत्या की गई थी।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घर में अपराध होने पर परिवार की जिम्मेदारी है कि वे पीड़ित की मृत्यु के कारण को स्पष्ट करें।
- 02जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने गौड़ आचारजी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
- 03पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष को प्रारंभिक दायित्व साबित करना होगा, लेकिन परिवार को भी स्पष्टीकरण देना होगा।
- 04सोमा आचारजी को शादी के बाद दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था, जो कि मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा के डीजीपी को गौड़ आचारजी की गिरफ्तारी के लिए निर्देश दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि घर की चारदीवारी में कोई अपराध होता है, तो घर में रहने वालों को यह बताना होगा कि पीड़ित की मृत्यु कैसे हुई। यह निर्णय गौड़ आचारजी के मामले में आया है, जिसमें उनकी पत्नी सोमा आचारजी की हत्या की गई थी। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने गौड़ आचारजी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 498ए के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष का प्रारंभिक दायित्व है, लेकिन परिवार को भी यह बताना होगा कि पीड़ित की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई। पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सोमा की जान बचाई जा सकती थी और क्या सामाजिक कलंक के डर से उसे खतरे में डाला गया था। इसके अलावा, कोर्ट ने त्रिपुरा के डीजीपी को फरार गौड़ का पता लगाने और उसे हिरासत में लेने का आदेश दिया।
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यह निर्णय घरेलू हिंसा और दहेज के मामलों में परिवार की जिम्मेदारी को स्पष्ट करता है, जिससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी।
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