सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी की सजा माफ
उसे सुधरने का एक मौका तो मिलना चाहिए... 23 साल पुराने मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में SC ने दोषी की सजा माफ की
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सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी रोहित चतुर्वेदी की सजा माफ कर दी है, यह कहते हुए कि सुधार का मौका मिलना चाहिए। अदालत ने उत्तराखंड सरकार की रिहाई की सिफारिश को खारिज करने वाले आदेश को मनमाना बताया और सुधारात्मक सिद्धांत पर जोर दिया।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई 2025 का गृह मंत्रालय का आदेश रद्द किया, जिसमें चतुर्वेदी की रिहाई की सिफारिश को ठुकराया गया था।
- 02अदालत ने कहा कि 23 साल जेल में बिताने के बाद दोषी को सुधार का एक मौका मिलना चाहिए।
- 03सुप्रीम कोर्ट ने यूनानी दार्शनिक प्लेटो का जिक्र करते हुए कहा कि न्याय का उद्देश्य सुधार होना चाहिए, प्रतिशोध नहीं।
- 04मधुमिता शुक्ला की हत्या 9 मई 2003 को लखनऊ में हुई थी, जब वह सात महीने की गर्भवती थीं।
- 05सीबीआई ने इस मामले में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी सहित अन्य को आरोपी बनाया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी रोहित चतुर्वेदी की सजा को माफ कर दिया है। अदालत ने उत्तराखंड सरकार के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें चतुर्वेदी की रिहाई की सिफारिश को खारिज किया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश मनमाना और बिना कारण था। जस्टिस BV नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि 23 साल जेल में बिताने के बाद, यदि दोषी सुधारना चाहता है, तो उसे एक मौका मिलना चाहिए। अदालत ने यूनानी दार्शनिक प्लेटो का हवाला देते हुए कहा कि न्याय का उद्देश्य प्रतिशोध नहीं, बल्कि सुधार होना चाहिए। यह मामला 9 मई 2003 को लखनऊ में कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या से जुड़ा है, जब वह गर्भवती थीं। सीबीआई ने इस हत्या की साजिश में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और अन्य को शामिल किया था।
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इस फैसले से न्याय प्रणाली में सुधारात्मक सिद्धांत को बल मिलता है, जो भविष्य में अन्य मामलों में भी प्रभाव डाल सकता है।
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