जाम्बिया में वेदांता का कॉपर प्लांट 60 दिनों के लिए बंद, सप्लाई पर पड़ेगा असर
वेदांता वाले अनिल अग्रवाल को बड़ा झटका! इस देश का कॉपर प्लांट 60 दिनों के लिए बंद, सप्लाई पर क्या पड़ेगा असर?
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Image: Jagran
वेदांता समूह की जाम्बिया स्थित कोंकोला कॉपर माइंस ने अपने नचांगा कॉपर स्मेल्टर को 60 दिनों के लिए बंद कर दिया है। यह कदम प्लांट की कार्यक्षमता में सुधार के लिए उठाया गया है, जिससे कॉपर और सल्फ्यूरिक एसिड की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
- 01कोंकोला कॉपर माइंस ने नचांगा कॉपर स्मेल्टर को 60 दिनों के लिए बंद किया है।
- 02इस शटडाउन का उद्देश्य प्लांट की कार्यक्षमता और उत्पादन प्रदर्शन में सुधार करना है।
- 03KCM का लक्ष्य 2030 तक कॉपर उत्पादन को 3 लाख टन प्रति वर्ष तक बढ़ाना है।
- 04जाम्बिया के अन्य बड़े प्लांट्स भी रखरखाव के लिए बंद हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है।
- 05विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई में कमी से कॉपर की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
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वेदांता समूह की जाम्बिया स्थित कोंकोला कॉपर माइंस ने अपने नचांगा कॉपर स्मेल्टर को आवश्यक मरम्मत और रखरखाव के लिए 60 दिनों के लिए बंद कर दिया है। कंपनी ने बताया कि यह कदम प्लांट की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए उठाया गया है। KCM का लक्ष्य 2030 तक अपने कॉपर उत्पादन को 3 लाख टन प्रति वर्ष तक बढ़ाना है। जाम्बिया के खान मंत्रालय के अनुसार, KCM ने 2025 में 80,215 मीट्रिक टन कॉपर का उत्पादन किया था। इस समय जाम्बिया के अन्य बड़े कॉपर प्रोसेसिंग प्लांट्स भी रखरखाव के दौर से गुजर रहे हैं, जिससे कॉपर और सल्फ्यूरिक एसिड के उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई में कमी से कॉपर की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, KCM ने कहा है कि वह अपने नचांगा टेलिंग्स लीच प्लांट के माध्यम से सल्फ्यूरिक एसिड की सप्लाई जारी रखेगा।
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जाम्बिया में कॉपर और सल्फ्यूरिक एसिड के उत्पादन में कमी आने से स्थानीय बाजार में सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है।
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