एनजीटी ने 11 हजार लीटर दूध बहाने के मामले में लिया संज्ञान
11 हजार लीटर दूध बहाने के मामले में NGT ने लिया संज्ञान
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मध्य प्रदेश की नर्मदा नदी में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियों के प्रवाह पर गंभीरता से संज्ञान लिया है। एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस मामले की जांच के लिए आदेश दिया है।
- 01सीहोर जिले में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान 11 हजार लीटर दूध नर्मदा में प्रवाहित किया गया।
- 02एनजीटी ने प्रदूषण के प्रभाव का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक रिपोर्ट की मांग की है।
- 03जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 के तहत नदियों में किसी भी प्रदूषक सामग्री को प्रवाहित करना प्रतिबंधित है।
- 04अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
- 05दूध के प्रवाह से पानी में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जो जलीय जीवों के लिए हानिकारक है।
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मध्य प्रदेश की नर्मदा नदी में एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियों के प्रवाह के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को निर्देश दिया है कि वे इस मामले की जांच करें और एक विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि इस तरह की गतिविधियों से नदी का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है, जिससे जलीय जीवों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है। एनजीटी ने कहा कि जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 के तहत नदियों में किसी भी प्रदूषक सामग्री को प्रवाहित करना प्रतिबंधित है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। एनजीटी ने यह भी कहा कि दूध जैसे कार्बनिक तत्वों के प्रवाह से पानी में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जिससे जलीय जीवों का जीवन प्रभावित हो सकता है।
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इस मामले का प्रभाव नर्मदा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय जल स्रोतों पर पड़ सकता है।
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