संविधान सभा में गोवध पर मुस्लिम सदस्यों की महत्वपूर्ण चर्चा
संविधान सभा का वो अनसुना किस्सा... जब गोवध के खिलाफ मुस्लिम सदस्यों ने उठाई थी आवाज

Image: Jagran
1948 में संविधान सभा में गोवध पर चर्चा के दौरान मुस्लिम सदस्यों सैयद मुहम्मद सादुल्ला और जेड. एच. लारी ने बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए स्पष्ट कानून बनाने की वकालत की। यह बहस आज भी प्रासंगिक है, जो आपसी समझ की आवश्यकता को दर्शाती है।
- 01सैयद मुहम्मद सादुल्ला ने कुरान का हवाला देते हुए कहा कि धर्म के नाम पर जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।
- 02जेड. एच. लारी ने स्पष्ट कानून बनाने की मांग की ताकि मुस्लिम समुदाय को भ्रमित न किया जाए।
- 03संविधान के अनुच्छेद 48 में गाय और बछड़ों के वध पर रोक लगाने का प्रावधान शामिल किया गया।
- 04सादुल्ला ने गरीबी का जिक्र करते हुए कहा कि गरीब लोग केवल बूढ़ी गायों का मांस खाते हैं।
- 05यह बहस आज भी समाज में आपसी समझ और धार्मिक भावनाओं के सम्मान की आवश्यकता को दर्शाती है।
Advertisement
In-Article Ad
नवंबर 1948 में संविधान सभा में गोवध पर एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जिसमें मुस्लिम सदस्यों सैयद मुहम्मद सादुल्ला और जेड. एच. लारी ने बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए स्पष्ट कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सादुल्ला ने कहा कि धर्म के नाम पर जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया कि मुस्लिम केवल आर्थिक कारणों से गाय नहीं काटते हैं। दूसरी ओर, लारी ने कानून में अस्पष्टता के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि इसे मौलिक अधिकारों में शामिल किया जाना चाहिए। अंततः, संविधान के अनुच्छेद 48 में गाय और बछड़ों के वध पर रोक लगाने का प्रावधान शामिल किया गया। यह चर्चा आज भी प्रासंगिक है, जो हमें सिखाती है कि आपसी समझ और स्पष्टता के साथ ही देश की बुनियाद रखी जा सकती है।
Advertisement
In-Article Ad
यह चर्चा आज भी समाज में गोवंश की सुरक्षा और धार्मिक भावनाओं के सम्मान की आवश्यकता को दर्शाती है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि गोवध पर स्पष्ट कानून बनाना आवश्यक है?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




