न्यूयॉर्क में जातिगत भेदभाव से जुड़े विधेयक हुए खारिज, हिंदू संगठनों ने जताई खुशी

Image: Jagran
न्यूयॉर्क में जातिगत भेदभाव से संबंधित दो विधेयक, जो जाति को संरक्षित श्रेणी बनाने का प्रयास कर रहे थे, असेंबली में खारिज कर दिए गए। हिंदू संगठनों ने इसे अपनी पहचान की रक्षा में एक जीत बताया है।
- 01न्यूयॉर्क के विधायी सत्र में जातिगत भेदभाव से जुड़े दो विधेयक खारिज कर दिए गए हैं।
- 02विधेयक का विरोध 'द कोलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका' द्वारा किया गया था।
- 03विधेयक के समर्थकों ने मौजूदा कानूनों में जातिगत संरक्षण की कमी की बात की।
- 04सुधा जगन्नाथन ने इसे नागरिक अधिकारों की जीत बताया।
- 05विधेयक को स्टेट सीनेटर जेम्स सैंडर्स जूनियर और असेंबली मेंबर स्टीवन रागा ने प्रायोजित किया था।
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न्यूयॉर्क में जातिगत भेदभाव से संबंधित दो विधेयक, न्यूयॉर्क सीनेट बिल एस.6531 और असेंबली बिल ए.6920, असेंबली में खारिज कर दिए गए हैं। इन विधेयकों का उद्देश्य जाति को एक संरक्षित श्रेणी के रूप में शामिल करना था, लेकिन इन पर बहस के बाद इन्हें पारित नहीं किया जा सका। 'द कोलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका' ने इन विधेयकों के खिलाफ अभियान चलाया, जिसमें स्थानीय निवासियों से इन विधेयकों के खिलाफ मतदान करने का आग्रह किया गया। संगठन की निदेशक सुधा जगन्नाथन ने इसे नागरिक अधिकारों की जीत बताया और कहा कि न्यूयॉर्क मेरी पहचान को मेरी संस्कृति के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। विधेयक के समर्थकों ने मौजूदा कानूनों में जातिगत संरक्षण की कमी की बात की, जबकि विरोधियों ने इसे हिंदुओं और भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देने वाला बताया।
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न्यूयॉर्क में जातिगत भेदभाव से जुड़े विधेयकों का खारिज होना स्थानीय हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है।
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