लखनऊ की आलिया रिजवी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कठपुतलियां बनाई, अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान
लखनऊ की आलिया रिजवी ने कतरन से बनाई कठपुतलियां, पर्यावरण संदेश से जीता अंतरराष्ट्रीय मंच

Image: Jagran
लखनऊ की 14 वर्षीय आलिया फातिमा रिजवी ने कपड़ों की कतरनों से कठपुतलियां बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है। उनका चयन स्लिंगशॉट चैलेंज में हुआ है, जिसमें उन्हें एक हजार डॉलर का पुरस्कार मिला है। आलिया का उद्देश्य बच्चों को कचरा प्रबंधन और रीसाइक्लिंग के प्रति जागरूक करना है।
- 01आलिया रिजवी ने कपड़ों की कतरनों से कठपुतलियां बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
- 02उन्हें स्लिंगशॉट चैलेंज में चयनित होने पर एक हजार डॉलर का पुरस्कार मिला।
- 03आलिया का प्रोजेक्ट बच्चों को कचरा प्रबंधन और रीसाइक्लिंग के प्रति जागरूक करने पर केंद्रित है।
- 04वह अक्टूबर में वाशिंगटन डीसी में युवा चेंजमेकर्स के साथ सम्मानित की जाएंगी।
- 05आलिया का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकारों की नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की है।
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लखनऊ की 14 वर्षीय आलिया फातिमा रिजवी ने कपड़ों की कतरनों से कठपुतलियां बनाकर पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संदेश दिया है। आलिया, जो लॉ मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज की छात्रा हैं, का चयन प्रतिष्ठित स्लिंगशॉट चैलेंज में हुआ है, जिसे नेशनल ज्योग्राफिक और डिज्नी द्वारा आयोजित किया गया था। इस प्रतियोगिता में आलिया को एक हजार डॉलर (लगभग 95-96 हजार रुपये) का पुरस्कार मिला। उनका उद्देश्य बच्चों को कचरा प्रबंधन और रीसाइक्लिंग के प्रति जागरूक करना है, और उन्होंने इस प्रोजेक्ट के तहत कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना बनाई है। आलिया का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति को अपने स्तर पर प्रयास करने चाहिए। उनकी कहानी ने न केवल लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि युवा सोच दुनिया भर में पहचान बना सकती है।
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आलिया के प्रयासों ने स्थानीय स्तर पर बच्चों को कचरा प्रबंधन और रीसाइक्लिंग के प्रति जागरूक किया है।
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