बद्रीनाथ धाम में शंख न बजाने की धार्मिक और वैज्ञानिक वजहें
बद्रीनाथ धाम में क्यों नहीं बजता शंख? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक वजह
Aaj Tak
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बद्रीनाथ धाम, उत्तराखंड में भगवान विष्णु का प्रमुख स्थल है, जहां पूजा के दौरान शंख नहीं बजाया जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान भगवान विष्णु की तपोभूमि है और शंख की ध्वनि साधना में बाधा डाल सकती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, शंख की तेज ध्वनि बर्फबारी के दौरान हिमस्खलन का कारण बन सकती है।
- 01बद्रीनाथ धाम में शंख न बजाने की परंपरा है।
- 02यह स्थान भगवान विष्णु की तपोभूमि माना जाता है।
- 03शंख की ध्वनि साधना में बाधा डाल सकती है।
- 04नागों की मौजूदगी के कारण भी शंख न बजाने की परंपरा है।
- 05वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, शंख की ध्वनि हिमस्खलन का कारण बन सकती है।
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बद्रीनाथ धाम, जो उत्तराखंड में स्थित है, भगवान विष्णु का एक महत्वपूर्ण स्थल है। यहां पूजा के समय शंख न बजाने की परंपरा है, जिसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने यहां ध्यान किया था और शंख की ध्वनि साधना में बाधा डाल सकती है। एक कथा के अनुसार, माता लक्ष्मी की साधना को भंग न करने के लिए शंख नहीं बजाया गया था। इसके अलावा, एक अन्य पौराणिक कथा में बताया गया है कि एक राक्षस शंख में छिपा था, जिससे नुकसान की आशंका थी। नागों की मौजूदगी भी इस परंपरा का एक कारण है, क्योंकि शंख की ध्वनि उन्हें परेशान कर सकती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, बद्रीनाथ का बर्फीला क्षेत्र और शंख की तेज ध्वनि हिमस्खलन जैसी स्थितियों को जन्म दे सकती है। इस प्रकार, यह परंपरा धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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