भारतीय आम का वैश्विक बाजार में प्रवेश: विकिरण तकनीक की भूमिका
अमेरिका से जापान तक कैसे पहुंच रहा भारतीय आम? एक तकनीक ने बदल दिया पूरा खेल
Jagran
Image: Jagran
भारतीय आमों का निर्यात अब अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में तेजी से बढ़ रहा है, जो भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित विकिरण तकनीक की मदद से संभव हो रहा है। यह तकनीक फलों की भंडारण अवधि को बढ़ाती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।
- 01विकिरण तकनीक से भारतीय आमों की भंडारण अवधि बढ़ी है।
- 02अमेरिका में आमों के आयात नियम सख्त हैं, जो विकिरण तकनीक से हल हो रहे हैं।
- 03भारत हर साल लगभग 30 हजार टन विकिरण उपचारित आम का निर्यात करता है।
- 04महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के किसानों को इस तकनीक से सबसे अधिक लाभ मिल रहा है।
- 05यह तकनीक अन्य फलों जैसे लीची और अनार के लिए भी उपयोग की जा रही है।
Advertisement
In-Article Ad
भारतीय आमों का निर्यात अब अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में तेजी से बढ़ रहा है, जो भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा विकसित विकिरण तकनीक की मदद से संभव हो रहा है। यह तकनीक आम और लीची जैसे जल्दी खराब होने वाले फलों की भंडारण अवधि को बढ़ाती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है। भारत हर साल 240 लाख टन से अधिक आम का उत्पादन करता है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग आधा है। विकिरण तकनीक के माध्यम से आमों की भंडारण अवधि 20 दिनों तक बढ़ गई है, जो पहले केवल एक सप्ताह थी। इससे समुद्री मार्ग से निर्यात संभव हो गया है। भारत में वर्तमान में 33 विकिरण उपचार केंद्र हैं, जिनमें से मुंबई, बेंगलुरु, नासिक और अहमदाबाद को अमेरिका से प्रमाणन मिला हुआ है। यह तकनीक न केवल आमों के लिए, बल्कि लीची और अनार जैसे अन्य फलों के लिए भी उपयोग की जा रही है।
Advertisement
In-Article Ad
यह तकनीक भारतीय किसानों की आय में वृद्धि कर रही है और कृषि निर्यात को बढ़ावा दे रही है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि विकिरण तकनीक का उपयोग अन्य फलों के निर्यात में भी किया जाना चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।
-1778175627720.webp&w=1200&q=75)


