भारत की ब्रह्मोस मिसाइल डील से चीन को मिलेगा नया सिरदर्द
ड्रैगन की छाती पर मूंग दलेगा भारत, चीन के आंगन में तीन तरफ से गूंजेगी ब्रह्मोस की दहाड़, एक और डील 'डन'
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भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल वियतनाम के साथ डील के करीब है, जो चीन के लिए एक नई चुनौती बन सकती है। यह डील वियतनाम के साउथ चाइना सी में चीन के साथ तनाव को और बढ़ा सकती है, और भारत की रक्षा रणनीति को मजबूत करेगी।
- 01वियतनाम के साथ ब्रह्मोस डील लगभग सिग्नेचर स्टेज पर है, केवल कीमत पर अंतिम बातचीत चल रही है।
- 02भारत ने 2022 में फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस डील की थी।
- 03ब्रह्मोस मिसाइल की गति मैक 2.5 से 2.8 के बीच है, जो लगभग 3,000 किमी प्रति घंटा है।
- 04ब्रह्मोस को चार प्लेटफार्मों से लॉन्च किया जा सकता है: जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी।
- 05अगर यह डील होती है, तो यह भारत की रक्षा निर्यात प्रोफाइल को और मजबूत करेगी।
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भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल अब वियतनाम के साथ एक महत्वपूर्ण डील के करीब है, जो चीन के लिए एक नई सुरक्षा चुनौती पेश कर सकती है। Nikkei Asia की रिपोर्ट के अनुसार, वियतनाम और भारत के बीच ब्रह्मोस की बिक्री लगभग सिग्नेचर स्टेज पर है, जिसमें केवल कीमत जैसे मुद्दों पर अंतिम बातचीत चल रही है। वियतनाम और चीन के बीच साउथ चाइना सी में लंबे समय से तनाव है, और यदि वियतनाम को ब्रह्मोस मिलती है, तो यह चीन को एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश होगा। भारत ने पहले ही फिलीपींस और इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस डील की है, जिससे ASEAN क्षेत्र में उसकी रक्षा मौजूदगी बढ़ रही है। ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में से एक माना जाता है, जो जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है। इसकी गति मैक 2.5 से 2.8 है, और यह 290 किलोमीटर तक मार कर सकती है। यदि वियतनाम यह डील फाइनल करता है, तो यह भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को और मजबूत करेगा।
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यदि वियतनाम ब्रह्मोस मिसाइल खरीदता है, तो यह चीन के प्रति वियतनाम की सैन्य ताकत को बढ़ाएगा और भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को मजबूत करेगा।
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