गंगा दशहरा पर पितृ चालीसा का पाठ करने का महत्व
गंगा दशहरा पर करें पितृ चालीसा का पाठ, पूर्वजों को मिलेगी तृप्ति
Jagran
Image: Jagran
गंगा दशहरा का पर्व हिंदू धर्म में मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक है। इस दिन पितृ चालीसा का पाठ करने से पूर्वजों को तृप्ति मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो पितृपक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाए हैं।
- 01गंगा दशहरा पर मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का महत्व है।
- 02पितृ चालीसा का पाठ करने से पूर्वजों को तृप्ति मिलती है।
- 03इस दिन पितृ पूजन का महत्व बढ़ जाता है।
- 04पितृ चालीसा का पाठ श्रद्धा के साथ करना चाहिए।
- 05पाठ के बाद भोग लगाकर गरीबों में बांटने की परंपरा है।
Advertisement
In-Article Ad
गंगा दशहरा, जो मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का पर्व है, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए मां गंगा को धरती पर लाने के लिए कठिन तप किया। इस दिन पितृ चालीसा का पाठ करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर उन लोगों के लिए जो पितृपक्ष में श्राद्ध या तर्पण नहीं कर पाए। माना जाता है कि इस दिन किया गया पाठ पूर्वजों को तृप्ति प्रदान करता है और वे अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। पितृ चालीसा का पाठ करने के लिए सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनना चाहिए। इसके बाद दक्षिण दिशा में चौकी स्थापित करके पूर्वजों की तस्वीर रखकर श्रद्धा के साथ पाठ करना चाहिए। पाठ के बाद सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाकर इसे गरीबों में बांटने की परंपरा है।
Advertisement
In-Article Ad
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आप गंगा दशहरा पर पितृ चालीसा का पाठ करते हैं?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




