डेरिवेटिव ट्रेडिंग में गिरावट, एसटीटी में वृद्धि का असर
एसटीटी बढ़ते ही डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर ब्रेक! वॉल्यूम गिरा 6% जबकि शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी, निवेशकों की बदली रणनीति
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अप्रैल में भारत के शेयर बाजार में नकदी कारोबार में 7% की वृद्धि हुई, जबकि सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में वृद्धि के कारण डेरिवेटिव ट्रेडिंग में 6% की गिरावट आई। बेंचमार्क सूचकांकों ने एक साल में सबसे मजबूत मासिक रिकवरी दर्ज की, जिसमें सेंसेक्स में 6.9% और निफ्टी में 7.5% की बढ़ोतरी हुई।
- 01डेरिवेटिव ट्रेडिंग में एसटीटी की वृद्धि से 6% की गिरावट आई।
- 02नकदी बाजार का टर्नओवर 7% बढ़ा, औसत टर्नओवर 1.44 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा।
- 03सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः 6.9% और 7.5% की बढ़ोतरी हुई।
- 04एनएसई के सक्रिय क्लाइंट आधार में 35 लाख की कमी आई, 4.52 करोड़ पर पहुंचा।
- 05बीएसई ने डेरिवेटिव बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 50% से अधिक की।
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अप्रैल में भारत के शेयर बाजार में महत्वपूर्ण गतिविधियाँ देखने को मिलीं। नकदी बाजार का टर्नओवर 7% बढ़कर 1.44 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में वृद्धि के कारण डेरिवेटिव ट्रेडिंग में 6% की गिरावट आई। 1 अप्रैल से वायदा कारोबार पर एसटीटी को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% किया गया। इस दौरान सेंसेक्स में 6.9% और निफ्टी में 7.5% की बढ़ोतरी हुई, जो कि पिछले एक साल में सबसे मजबूत मासिक रिकवरी है। हालांकि, एनएसई के सक्रिय क्लाइंट आधार में 35 लाख की कमी आई, जो दर्शाता है कि छोटे निवेशकों ने बाजार से दूरी बना ली है। बीएसई ने डेरिवेटिव बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 50% से अधिक कर ली है, जबकि एनएसई का औसत टर्नओवर 217 लाख करोड़ रुपये रहा।
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डेरिवेटिव ट्रेडिंग में गिरावट का असर छोटे निवेशकों पर पड़ रहा है, जिससे वे बाजार से दूर हो रहे हैं।
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