असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश, जानें इसके उद्देश्य
असम सरकार ने विधानसभा में UCC बिल किया पेश, जानें इस बिल को लाने का मकसद

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असम सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक (UCC Bill 2026) पेश किया है, जिसका उद्देश्य विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार, और लिव-इन संबंधों को एक समान कानूनी ढांचे में लाना है। विधेयक पर चर्चा मंगलवार को होने की संभावना है।
- 01समान नागरिक संहिता विधेयक (UCC Bill 2026) असम विधानसभा में पेश किया गया।
- 02मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विधानसभा चुनाव से पहले इस बिल का ऐलान किया था।
- 03बिल का उद्देश्य विवाह की न्यूनतम उम्र, बहुविवाह, और संपत्ति के अधिकारों को नियंत्रित करना है।
- 04विपक्ष ने विधेयक का विरोध करते हुए सभी पक्षों से चर्चा की मांग की है।
- 05बिल के अनुसार, पुरुषों के लिए न्यूनतम विवाह की उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है।
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असम सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक (UCC Bill 2026) पेश किया है, जिसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से संबंधित कानूनों को एक समान कानूनी ढांचे में लाना है। संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की ओर से यह विधेयक पेश किया। इस विधेयक में शादी की न्यूनतम उम्र, बहुविवाह पर प्रतिबंध, और संपत्ति में अधिकार जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। विधेयक का विरोध भी हुआ है, जिसमें विपक्षी दलों ने इसे पेश करने से पहले सभी पक्षों के साथ चर्चा करने की मांग की है। असम विधानसभा का विशेष सत्र 21 से 26 मई तक चलेगा, और यूसीसी विधेयक पर चर्चा मंगलवार को होने की संभावना है। इस विधेयक के लागू होने के बाद सभी धर्मों के लोगों पर समान कानून लागू होंगे।
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यूसीसी विधेयक के लागू होने से असम के सभी धर्मों के लोगों पर समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे।
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