भारत की रक्षा कूटनीति से तुर्की की चिंताएँ बढ़ीं, ब्रह्मोस की तैनाती से रणनीतिक घेराबंदी
Explainer : तुर्की तीन तरफ से ब्रह्मोस के निशाने पर, भारत की रक्षा कूटनीति से एर्दोआन परेशान

Image: News 18 Hindi
भारत की रक्षा कूटनीति ने तुर्की को घेर लिया है, जिससे तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यप एर्दोआन परेशान हैं। भारत ने साइप्रस और ग्रीस को ब्रह्मोस और एयर डिफेंस सिस्टम देने की योजना बनाई है, जो तुर्की की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को चुनौती दे रहा है।
- 01भारत ने साइप्रस और ग्रीस को ब्रह्मोस और एयर डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति करने की योजना बनाई है।
- 02तुर्की की रणनीतिक घेराबंदी का मुख्य कारण भारत की बढ़ती रक्षा निर्यात क्षमता है।
- 03एर्दोआन की मुस्लिम दुनिया में नेतृत्व की कोशिशें कई देशों के लिए विवादास्पद बन गई हैं।
- 04भारत ने सीधे टकराव के बजाय साइलेंट स्ट्रेटेजिक वारफेयर की रणनीति अपनाई है।
- 05तुर्की के लिए साइप्रस, ग्रीस और आर्मीनिया का त्रिकोण एक बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है।
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तुर्की, जो इस्लामी नाटो का खलीफा बनने की कोशिश कर रहा है, अब भारत की रक्षा कूटनीति से परेशान है। भारत ने साइप्रस और ग्रीस को ब्रह्मोस मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति करने की योजना बनाई है, जिससे तुर्की की भूगोलिक स्थिति को खतरा है। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यप एर्दोआन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन अब भारत उसी मॉडल को उलटकर लागू कर रहा है। तुर्की के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह घेराबंदी सीधे युद्ध के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव के रूप में है। यदि तुर्की सैन्य प्रतिक्रिया देता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रामक दिखेगा, और यदि वह चुप रहता है, तो भारत धीरे-धीरे उसके प्रभाव क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत करेगा। इस स्थिति में, साइप्रस, ग्रीस और आर्मीनिया का त्रिकोण तुर्की के लिए एक सिरदर्द बनता जा रहा है।
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भारत की रक्षा निर्यात क्षमता बढ़ने से तुर्की की क्षेत्रीय स्थिति कमजोर हो सकती है।
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