भारत, अमेरिका और अन्य देशों में मुफ्त राशन वितरण की तुलना
चीन का 'डिबाओ' और अमेरिका का 'SNAP' प्रोग्राम... जानिए मुफ्त राशन और कैश बांटने में कौन सा देश है सबसे आगे?
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भारत ने 'सार्थक-PDS' योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को बेहतर राशन सुविधाएं देने का निर्णय लिया है। अमेरिका का SNAP प्रोग्राम, ब्रिटेन के फूड बैंकों और चीन के डिबाओ सिस्टम जैसी अन्य देशों की योजनाएं भी गरीबों की मदद करती हैं।
- 01भारत में 'सार्थक-PDS' योजना पर 25,530 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- 02अमेरिका का SNAP प्रोग्राम कम आय वाले लोगों को खाद्य सामग्री खरीदने के लिए हर महीने धनराशि देता है।
- 03ब्रिटेन में फूड बैंकों के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को खाद्य सामग्री और अन्य सहायता प्रदान की जाती है।
- 04चीन का डिबाओ योजना न्यूनतम आजीविका गारंटी के तहत नकद सहायता प्रदान करती है।
- 05मध्य पूर्व और अफ्रीका में भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गरीबों को राशन और खाद्य सहायता दी जाती है।
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भारत ने 27 मई को 'सार्थक-PDS' योजना की घोषणा की, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। इस योजना पर 25,530 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे 80 करोड़ लोगों को बेहतर राशन सुविधाएं मिलेंगी। अमेरिका का SNAP (Supplemental Nutrition Assistance Program) कम आय वाले परिवारों को हर महीने खाद्य सामग्री खरीदने के लिए सहायता प्रदान करता है। ब्रिटेन में फूड बैंकों के माध्यम से गरीबों को खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं दी जाती हैं। चीन में डिबाओ योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को नकद सहायता मिलती है। मध्य पूर्व और अफ्रीका में भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गरीबों की सहायता की जाती है। इन सभी देशों में सरकारें जरूरतमंदों को बुनियादी जरूरतों के लिए सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न तरीकों का उपयोग कर रही हैं।
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भारत में 80 करोड़ लोगों को बेहतर राशन सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी होंगी।
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