संसद में विधेयक पारित करने की दर में वृद्धि, बैठकें कम होने के बावजूद
संसद के बदले समीकरण: बैठकें कम होने के बावजूद विधेयक पारित होने की रफ्तार बरकरार, जानें आंकड़े
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व का अपमान करने का आरोप लगाया। 1952 से 2025 के बीच, संसद में 12,395 बैठकों में से केवल 4,070 विधेयक पारित हुए हैं। हालांकि, 17वीं लोक सभा में विधेयकों के पारित होने की दर 92 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि बैठकें कम हुई हैं।
- 01प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व का अपमान करने का आरोप लगाया।
- 021952 से 2025 के बीच 12,395 बैठकों में से 4,070 विधेयक पारित हुए।
- 0317वीं लोक सभा में विधेयकों के पारित होने की दर 92 प्रतिशत है।
- 04बैठकों की संख्या कम हुई है, लेकिन प्रति बैठक पारित विधेयकों की संख्या स्थिर है।
- 05संसद में प्रमुख दलों ने अधिक सवाल पूछे, जिससे प्रश्नों की औसत संख्या बढ़ी।
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18 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व की भ्रूण हत्या करने का आरोप लगाया। 1952 से 2025 के बीच, लोक सभा और राज्य सभा में कुल 12,395 बैठकों में से केवल 4,070 विधेयक पारित हुए हैं। हालांकि, विधेयकों के पारित होने की दर में सुधार हुआ है। 15वीं लोक सभा के दौरान पारित विधेयकों का प्रतिशत 56 था, जो 17वीं लोक सभा में बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया। यह दिलचस्प है कि इस दौरान संसद की बैठकें कम हुई हैं, लेकिन प्रति बैठक पारित विधेयकों की संख्या स्थिर बनी हुई है। उदाहरण के लिए, पहले लोक सभा में पांच संवैधानिक संशोधन विधेयक लाए गए थे, जो 5वीं लोक सभा में बढ़कर 18 हो गए। इसके बाद, 14वीं लोक सभा में यह आंकड़ा घटकर फिर से पांच पर आ गया। वर्तमान सरकार के तीन कार्यकालों में ऐसे विधेयकों की संख्या तीन-तीन रही है। 17वीं लोक सभा में प्रमुख दलों जैसे शिव सेना, वाईएसआरसीपी और डीएमके के सांसदों ने अधिक सवाल पूछे, जिससे प्रति सांसद पूछे गए प्रश्नों की औसत संख्या में वृद्धि हुई।
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विधायी प्रक्रिया में सुधार से आम जनता की जरूरतों को बेहतर तरीके से संबोधित किया जा सकेगा।
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