भारत और चिली के बीच खनिजों के लिए महत्वपूर्ण समझौता, चीन पर निर्भरता कम होगी
भारत को मिला जमीन में गड़ा खजाना खोदने का ऑफर, मिर्ची जैसा देश बनाएगा मालामाल, निकल जाएगी चीन की सारी हेकड़ी
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भारत और चिली के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) अंतिम चरण में है, जिसके तहत भारत को लिथियम, कॉपर और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की स्थायी आपूर्ति मिलेगी। यह समझौता चीन पर निर्भरता कम करने और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा।
- 01चिली के पास दुनिया के 20% से अधिक कॉपर और 30% लिथियम भंडार हैं।
- 02भारत और चिली CEPA को इस वर्ष की तीसरी या चौथी तिमाही में अंतिम रूप देने की योजना बना रहे हैं।
- 03भारत का लक्ष्य लिथियम और कॉपर जैसे खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
- 04चिली, भारत के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए उत्सुक है और खुद को दक्षिण अमेरिका की 'सिलिकॉन वैली' बनाना चाहता है।
- 05यह समझौता भारत के EV मिशन और ग्रीन एनर्जी कार्यक्रम को गति देने में मदद करेगा।
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भारत और चिली के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) अंतिम चरण में है, जो भारत को लिथियम, कॉपर और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। चिली, जो दुनिया में लिथियम उत्पादन में अग्रणी है, भारतीय कंपनियों को अपने खनन परियोजनाओं में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी और भारत की चीन पर निर्भरता कम होगी। चिली, भारतीय इंजीनियरों को अवसर देने के लिए भी उत्सुक है, जिससे वह दक्षिण अमेरिका की 'सिलिकॉन वैली' बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। भारत के लिए यह समझौता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसके इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ग्रीन एनर्जी कार्यक्रमों को गति देगा। दोनों देशों के बीच यह साझेदारी वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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यह समझौता भारत के इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन एनर्जी कार्यक्रमों को समर्थन देगा।
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