रायपुरा गांव: ब्राह्मणों का शासन और पुनर्निर्माण की अनोखी कहानी
सीकर के रायपुरा की अनोखी कहानी, सात पीढ़ियों तक रहा ब्राह्मणों का शासन, उजड़ने के बाद फिर बसा गांव

Image: News 18 Hindi
सीकर जिले के रायपुरा गांव की स्थापना करीब 400 साल पहले हुई थी, जहां सात पीढ़ियों तक ब्राह्मणों का शासन रहा। प्राकृतिक आपदा के बाद गांव को फिर से बसाया गया। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, और कई धार्मिक स्थल भी हैं।
- 01रायपुरा गांव की स्थापना 400 साल पहले हुई थी और यह ब्राह्मणों का प्रमुख स्थल रहा है।
- 02गांव में प्राकृतिक आपदा के बाद पुनर्निर्माण के लिए खोखर गौत्र के जाटों को फिर से बसाया गया।
- 03गांव को 2020 में ग्राम पंचायत का दर्जा मिला, और रोशनलाल रैगर पहले सरपंच बने।
- 04कृषि यहां की मुख्य आर्थिक गतिविधि है, जिसमें 150 परिवार शामिल हैं।
- 05गांव में नागा बाबा की समाधि और कई मंदिर हैं, जो धार्मिक महत्व रखते हैं।
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सीकर जिले के पलसाना ब्लॉक में स्थित रायपुरा गांव की स्थापना लगभग 400 साल पहले हुई थी। यह गांव अपनी समृद्ध परंपराओं और सामाजिक एकजुटता के लिए जाना जाता है। गांव में प्राचीन नागा बाबा की समाधि है, जो नागा संप्रदाय का प्रमुख स्थल है। रायपुरा की बसावट दो बार हुई, पहली बार पुरोहित गौत्र के ब्राह्मणों द्वारा और दूसरी बार खोखर गौत्र के जाटों द्वारा। सात पीढ़ियों तक ब्राह्मणों का शासन रहा, लेकिन प्राकृतिक आपदा के कारण गांव उजड़ गया। संवत 1817 में रानोली के राजपूतों ने गांव को फिर से बसाया। 2020 में रायपुरा को ग्राम पंचायत का दर्जा मिला और रोशनलाल रैगर पहले सरपंच बने। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, जिसमें गेहूं, सरसों, बाजरा और मोठ जैसी फसलें उगाई जाती हैं। गांव में धार्मिक स्थलों की भी भरपूरता है, जहां साधु संतों का जमावड़ा होता है।
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गांव के विकास में स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिन्होंने भूमि दान देकर कई विकास कार्य किए हैं।
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