जम्मू-कश्मीर में दरबार मूव की वापसी: 150 साल पुरानी परंपरा फिर जीवित
क्या है जम्मू-कश्मीर की 150 साल पुरानी परंपरा 'दरबार मूव'? चार साल बाद फिर लौटी, नेशनल कॉन्फ्रेंस का चुनावी वादा भी था
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जम्मू-कश्मीर में 150 साल पुरानी परंपरा 'दरबार मूव' चार साल के अंतराल के बाद फिर से शुरू हो गई है। यह परंपरा सरकारी दफ्तरों को गर्मियों में श्रीनगर और सर्दियों में जम्मू में स्थानांतरित करती है, जिससे प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
- 01दरबार मूव की परंपरा 150 साल पुरानी है, जिसे डोगरा शासकों ने शुरू किया था।
- 02यह परंपरा जम्मू और श्रीनगर के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए बनाई गई थी।
- 03चार साल बाद यह परंपरा फिर से शुरू की गई है, जिससे प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
- 04इससे स्थानीय लोगों को बेहतर सेवाएं मिलने की उम्मीद है।
- 05उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2021 में इसे रोकने का निर्णय लिया था, लेकिन अब इसे फिर से लागू किया गया है।
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जम्मू-कश्मीर में 'दरबार मूव' की परंपरा, जो लगभग 150 साल पुरानी है, एक बार फिर से शुरू हो गई है। यह परंपरा सरकारी दफ्तरों को गर्मियों में श्रीनगर और सर्दियों में जम्मू में स्थानांतरित करने का कार्य करती है। सोमवार से श्रीनगर में सरकारी कामकाज शुरू हो गया है, जिससे प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी आई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सचिवालय में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त किया। यह परंपरा डोगरा शासकों द्वारा शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य जम्मू और श्रीनगर के बीच संतुलन बनाए रखना था। पिछले चार वर्षों में इसे रोक दिया गया था, लेकिन अब इसकी वापसी से स्थानीय लोगों को प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच में सुधार की उम्मीद है।
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इस परंपरा की वापसी से स्थानीय लोगों को प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच में सुधार होगा, जिससे उनके कामकाज में आसानी होगी।
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