हर्षा रिछारिया और अनिलानंद महाराज के बीच विवाद: टीआरपी और ईर्ष्या का आरोप
हर्षा रिछारिया का पलटवार; हर्षानंदगिरी ने अनिलानंद महाराज के आरोपों को बताया ईर्ष्या और TRP का खेल
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मध्य प्रदेश में साधु-संतों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंदगिरी ने अनिलानंद महाराज के आरोपों का जवाब देते हुए उन्हें ईर्ष्या और टीआरपी की राजनीति का हिस्सा बताया। यह मामला संत समाज में चर्चा का विषय बन गया है।
- 01हर्षा रिछारिया ने अनिलानंद महाराज के आरोपों का कड़ा जवाब दिया।
- 02अनिलानंद महाराज ने हर्षा रिछारिया के सन्यास पर सवाल उठाए।
- 03हर्षानंदगिरी ने आरोप लगाया कि यह विवाद टीआरपी और ईर्ष्या का खेल है।
- 04संत समाज में इस विवाद पर गहरी चर्चा हो रही है।
- 05हर्षानंदगिरी ने अपमानजनक भाषा के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की।
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मध्य प्रदेश में साधु-संतों के बीच एक नया विवाद उभरा है, जिसमें हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंदगिरी ने संत समिति के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद महाराज के तीखे आरोपों का जवाब दिया है। अनिलानंद महाराज ने हर्षा रिछारिया के सन्यास को चुनौती देते हुए कहा कि यह वास्तविक सन्यास नहीं है और उन्होंने हर्षा पर प्रयागराज महाकुंभ को 'खराब' करने का भी आरोप लगाया। हर्षानंदगिरी ने इन टिप्पणियों को ईर्ष्या और टीआरपी की राजनीति का हिस्सा करार दिया और कहा कि वे लंबे समय से अपमान सह रही थीं, लेकिन अब चुप रहना संभव नहीं है। उन्होंने अनिलानंद महाराज द्वारा इस्तेमाल की गई अपमानजनक भाषा पर भी नाराजगी जताई। यह विवाद अब संत समाज और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, जिससे आने वाले सिंहस्थ मेले में संतों की भूमिका पर नई बहस छिड़ गई है।
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यह विवाद संत समाज में गहरी चर्चा का विषय बन गया है, जिससे धार्मिक समुदाय में विभाजन की संभावना बढ़ गई है।
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