भारतीय वायुसेना को राफेल और AMCA विमानों की आपूर्ति में देरी का सामना
नए राफेल में हो सकती है देरी, भारतीय वायुसेना के सामने आई ये बड़ी चुनौती
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। फ्रांस से 114 राफेल विमानों की मांग की गई है, लेकिन पहले राफेल 2031-32 में मिलेंगे। AMCA विमान की आपूर्ति 2036-37 तक संभव है। इस बीच, भारत को चीन और पाकिस्तान के फिफ्थ जेनरेशन विमानों का सामना करना होगा।
- 01भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 29-30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि 42 की आवश्यकता है।
- 02राफेल विमानों की लागत 2007 में 42,000 करोड़ से बढ़कर 3,25,000 करोड़ हो गई है।
- 03AMCA, जो भारत का पहला स्वदेशी फिफ्थ जेनरेशन विमान होगा, 2036-37 में उपलब्ध होगा।
- 04चीन के पास पहले से ही J20 और J35 जैसे फिफ्थ जेनरेशन के विमानों का बेड़ा है।
- 052016 में 36 राफेल विमानों का सौदा करीब 9 अरब डॉलर में हुआ था, जबकि 2007 के टेंडर में 126 विमानों का प्रावधान था।
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भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए फ्रांस को 114 राफेल विमानों की आपूर्ति के लिए आग्रहपत्र जारी किया गया है। हालांकि, पहले राफेल विमानों की आपूर्ति 2031-32 में शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, भारत में विकसित हो रहे एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) की आपूर्ति 2036-37 तक संभव है। वर्तमान में, वायुसेना में 29-30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि 42 की आवश्यकता है। राफेल विमानों की लागत में चार गुना वृद्धि हुई है, और तकनीकी स्तर पर बहुत अधिक सुधार नहीं किया जाएगा। इस बीच, चीन पहले से ही अपने फिफ्थ जेनरेशन के विमानों का संचालन कर रहा है, जिससे भारत को गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
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भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता में कमी से देश की सुरक्षा पर असर पड़ेगा।
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