कपास की कीमतों में 10% की वृद्धि, टेक्सटाइल उद्योग ने ड्यूटी-फ्री आयात की मांग की
Cotton Price: कपास 10% महंगी, सप्लाई की चिंता बढ़ी; टेक्सटाइल उद्योग ने मांगी ड्यूटी-फ्री आयात की इजाजत
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कपास की कीमतें इस महीने लगभग 10% बढ़ गई हैं, जो बेमौसम बारिश और उत्पादन में कमी के कारण है। टेक्सटाइल उद्योग ने सरकार से ड्यूटी-फ्री कपास आयात की अनुमति मांगी है, ताकि बढ़ती लागत का सामना किया जा सके।
- 01कपास की कीमतों में इस महीने 10% की वृद्धि हुई है।
- 02बेमौसम बारिश के कारण उत्पादन में कमी की आशंका है।
- 03टेक्सटाइल उद्योग ने ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति मांगी है।
- 04इस साल कपास का अनुमानित उत्पादन 290 लाख गांठ है, जबकि मांग 330 लाख गांठ है।
- 05यदि स्थिति नहीं बदली, तो निर्यात में गिरावट आ सकती है।
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कपास की कीमतें इस महीने लगभग 10% बढ़ गई हैं, जो बेमौसम बारिश के कारण फसल को हुए नुकसान और उत्पादन में कमी की आशंका के चलते हो रहा है। वर्तमान में, कपास का भाव 29,550 रुपये प्रति बेल्स (170 किलोग्राम) पर पहुंच गया है, जो अप्रैल में 26,000 रुपये से नीचे था। टेक्सटाइल उद्योग ने इस वृद्धि के मद्देनजर सरकार से ड्यूटी-फ्री कपास आयात की अनुमति मांगी है। उद्योग के अनुसार, इस साल कपास का अनुमानित उत्पादन 290 लाख गांठ है, जबकि घरेलू मांग 330 लाख गांठ है। इस अंतर के कारण उद्योग को आयात पर निर्भर होना पड़ रहा है। यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो गारमेंट सेक्टर में उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिससे निर्यात ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं। पिछले साल, सरकार ने पहले ही ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी, लेकिन इस साल भी अतिरिक्त 30 लाख गांठ कपास आयात की आवश्यकता होगी।
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कपास की बढ़ती कीमतों से टेक्सटाइल उद्योग को लागत बढ़ने का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन और निर्यात प्रभावित हो सकते हैं।
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