नेहरू के निधन के दिन हुई शादी: एक अनोखी कहानी
जिस दिन नेहरू का निधन हुआ, उस दिन मेरे पेरेंट्स की शादी थी ...बिना बाजे गाजे कैसे हुआ विवाह

Image: News 18 Hindi
27 मई 1964 को, जब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ, जौनपुर में कई शादियाँ सादगी से संपन्न हुईं। इस दिन का मातम शादी के माहौल पर गहरा असर डाल गया, जिससे बारात बिना बैंड-बाजे और उत्सव के संपन्न हुई।
- 01नेहरू के निधन की खबर ने देशभर में शोक फैलाया, जिससे शादी वाले घरों में सन्नाटा छा गया।
- 02शादी की तैयारियाँ पूरी होने के बावजूद बारात बिना बैंड-बाजे के आई और समारोह में कोई उत्सव नहीं था।
- 03शादी के दौरान सभी की आँखों में आंसू थे, और लोग एक-दूसरे से नेहरू के निधन पर चर्चा कर रहे थे।
- 04तब की शादियाँ कई दिनों तक चलती थीं, जिसमें विभिन्न रस्में होती थीं।
- 05इस दिन की शादी को दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार हर साल अपनी सालगिरह पर याद करते हैं।
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27 मई 1964 को, जब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ, उस दिन जौनपुर में कई शादियाँ सादगी से संपन्न हुईं। नेहरू के निधन की खबर फैलते ही पूरे देश में मातम छा गया। शादी वाले घरों में सन्नाटा और शोक का माहौल था। बारात बिना बैंड-बाजे के आई और समारोह में कोई उत्सव नहीं था। इस दिन की शादी को दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार हर साल अपनी सालगिरह पर याद करते हैं। नेहरू के निधन के समय सभी की आँखों में आंसू थे, और लोग एक-दूसरे से चर्चा कर रहे थे कि अब देश का क्या होगा। उस समय की शादियाँ आमतौर पर कई दिनों तक चलती थीं, जिसमें विभिन्न रस्में होती थीं। इस दिन की शादी ने एक अनोखी कहानी बना दी, जो आज भी याद की जाती है।
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नेहरू के निधन का असर जौनपुर में शादी के समारोह पर पड़ा, जिससे समारोह सादगी से संपन्न हुआ।
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