अमेरिका में AI डेटा सेंटर्स पर बढ़ते विरोध के पीछे विदेशी साजिश का आरोप
अमेरिका में अरबों डॉलर के AI प्रोजेक्ट्स क्यों हो रहे हैं बंद? क्या ड्रैगन ने ढूंढ ली अमेरिकी कंपनियों की सबसे कमजोर नस?

Image: Zee News
अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर्स के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां स्थानीय लोग पानी, बिजली और शोर की समस्याओं से परेशान हैं। टेक कंपनियों का आरोप है कि चीन और अन्य देशों के फेक अकाउंट्स इस विरोध को भड़का रहे हैं।
- 0171% अमेरिकी नागरिक डेटा सेंटर्स के निर्माण के खिलाफ हैं।
- 02प्रदर्शनकारियों का कहना है कि डेटा सेंटर्स की वजह से बिजली और पानी की समस्या बढ़ रही है।
- 03टेक कंपनियों का आरोप है कि विदेशी बॉट्स अमेरिका में विरोध को बढ़ावा दे रहे हैं।
- 04केविन ओ लेरी ने अपने डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को भारी विरोध के कारण बंद किया।
- 05पर्यावरण संगठनों का कहना है कि टेक कंपनियां अपनी कमियों को छिपाने के लिए चीन पर आरोप लगा रही हैं।
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अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर्स के खिलाफ स्थानीय लोगों का विरोध बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन सेंटर्स के कारण पानी और बिजली की समस्या उत्पन्न हो रही है, साथ ही चौबीसों घंटे होने वाले शोर से उनकी नींद हराम हो रही है। टेक कंपनियों का दावा है कि इस विरोध को भड़काने में चीन और अन्य देशों के फेक अकाउंट्स का हाथ है। NetChoice के सीईओ स्टीव डेलबिएनको ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों में AI के कारण नौकरी और महंगाई का डर है, जिसका फायदा विदेशी ताकतें उठा रही हैं। एक हालिया गैलप पोल में 71% अमेरिकी नागरिकों ने डेटा सेंटर्स के निर्माण के खिलाफ अपनी असहमति जताई है। इस विरोध के चलते कई बड़े प्रोजेक्ट्स, जैसे कि केविन ओ लेरी का डेटा सेंटर, बंद होने की कगार पर हैं। पर्यावरण संगठनों का कहना है कि जब भी कंपनियां संकट में होती हैं, वे विदेशी साजिशों का बहाना बनाती हैं।
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डेटा सेंटर्स के निर्माण के कारण स्थानीय लोगों को पानी और बिजली की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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