भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि का नवीनीकरण: स्थिति और चुनौतियाँ
भारत-बांग्लादेश के बीच क्या है गंगा जल संधि, जिसपर पड़ोसी देश दे रहा है धमकी

Image: Ndtv
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे का समझौता दिसंबर 2023 में समाप्त हो रहा है। बांग्लादेश ने नए प्रस्तावों को 'तर्कहीन' बताया है, जबकि दोनों देशों की तकनीकी टीमें नए समझौते के लिए बातचीत कर रही हैं। समझौते का नवीनीकरण जल प्रवाह के आधार पर किया जाएगा, लेकिन बांग्लादेश अधिक जल प्रवाह की मांग कर रहा है।
- 011996 में भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे का 30 वर्षीय समझौता हुआ था।
- 02समझौते में जल बंटवारे का आधार नदी के जल प्रवाह और वर्षा की मात्रा पर निर्भर करता है।
- 03बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री ने बताया कि विशेषज्ञ समिति इस मुद्दे पर चर्चा कर रही है।
- 04भारत ने फरक्का प्वाइंट पर जल प्रवाह के आधार पर नया ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव रखा है।
- 05बांग्लादेश ने पिछले 40 वर्षों के जल प्रवाह को आधार बनाने का सुझाव दिया है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे तर्कसंगत नहीं माना।
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भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे का समझौता दिसंबर 2023 में समाप्त हो रहा है, और इसके नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिद उद्दीन चौधरी ने बताया कि सरकार ने इस मामले पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। दोनों देशों की तकनीकी टीमें इस मुद्दे पर चर्चा कर रही हैं, लेकिन बांग्लादेश ने भारत के नए प्रस्तावों को 'तर्कहीन' बताया है। 1996 में हुए पहले समझौते के अनुसार, जल बंटवारा नदी के जल प्रवाह और वर्षा की मात्रा पर निर्भर करता है। यदि जल प्रवाह 70,000 क्यूसेक से कम है, तो दोनों देश जल को बराबर बांटेंगे। बांग्लादेश ने पिछले 40 वर्षों के जल प्रवाह को आधार बनाने का सुझाव दिया है, जबकि भारत ने फरक्का प्वाइंट पर जल प्रवाह के आधार पर नया ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव रखा है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, और उम्मीद है कि संयुक्त नदी आयोग की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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गंगा जल बंटवारे का समझौता बांग्लादेश के जल संसाधनों और कृषि पर सीधा प्रभाव डालता है।
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