सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई रेलवे पुलिसकर्मियों की जमानत रद की, जबरन वसूली का मामला
‘जब पुलिस ही वसूली करने लगे तो लोग बेबस हो जाते हैं’, SC ने मुंबई के 3 रेलवे पुलिसकर्मियों की जमानत की रद
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सुप्रीम कोर्ट ने तीन रेलवे पुलिसकर्मियों की अग्रिम जमानत रद कर दी है, जो नाबालिग के साथ यात्रा कर रहे व्यक्ति से जबरन वसूली और धमकी देने के आरोपी हैं। कोर्ट ने कहा कि जब कानून लागू करने वाले ही अपराध करने लगे, तो नागरिक असहाय हो जाते हैं।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए जमानत रद की।
- 02पुलिसकर्मियों ने एक यात्री से 14 ग्राम सोने का बिस्कुट और 31,900 रुपये जबरन वसूले।
- 03राज्य सरकार ने हाल ही में तीनों पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया।
- 04कोर्ट ने कहा कि कानून लागू करने वालों के खिलाफ सामान्य धारणा लागू नहीं होती।
- 05यह घटना पिछले साल अगस्त में हुई थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर नाबालिग के साथ यात्रा कर रहे एक व्यक्ति से जबरन वसूली और आपराधिक धमकी देने के आरोप में तीन रेलवे पुलिसकर्मियों की अग्रिम जमानत रद कर दी है। इन पुलिसकर्मियों को पहले बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत मिली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि जब कानून के रखवाले ही वसूली करने लगते हैं, तो नागरिक बेबस हो जाते हैं। पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने एक यात्री से 14 ग्राम सोने का बिस्कुट और 31,900 रुपये नकद जबरन वसूले। इस मामले में पुलिसकर्मियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि हाल ही में विभागीय जांच के बाद राज्य सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय सामान्य धारणा लागू नहीं होती।
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यह निर्णय पुलिस प्रशासन की जवाबदेही को बढ़ाता है और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।
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