केजरीवाल और सिसोदिया ने अदालत में पेश होने से किया इनकार, सुनवाई पर सवाल
आज पेशी है, लेकिन केजरीवाल-सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत में जाने से किया इनकार, अब सुनवाई का क्या होगा?
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दिल्ली शराब नीति घोटाले के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत में पेश होने से इनकार कर दिया है। केजरीवाल का कहना है कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, जबकि कानूनी जानकारों का मानना है कि अदालत उनकी अनुपस्थिति में भी सुनवाई जारी रख सकती है।
- 01अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने अदालत में पेश नहीं होने का निर्णय लिया।
- 02केजरीवाल ने न्याय की उम्मीद टूटने का हवाला दिया।
- 03सुनवाई जारी रखने के लिए अदालत स्वतंत्र वकील नियुक्त कर सकती है।
- 04अदालत गैरमौजूदगी पर सख्त रुख अपना सकती है।
- 05केजरीवाल ने जज के बच्चों के संबंध में हितों के टकराव का तर्क दिया।
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दिल्ली शराब नीति घोटाले के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत में पेश होने से इनकार कर दिया है। केजरीवाल ने 27 अप्रैल को जस्टिस को एक पत्र लिखकर कहा कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है और उन्होंने महात्मा गांधी की तरह सत्याग्रह करने का निर्णय लिया है। इसके एक दिन बाद, मनीष सिसोदिया ने भी अदालत में पेश नहीं होने का निर्णय लिया। कानूनी जानकारों का मानना है कि अदालत उनकी अनुपस्थिति में भी मामले की सुनवाई जारी रख सकती है। अदालत किसी स्वतंत्र वकील या 'एमीकस क्यूरी' को नियुक्त करने का विकल्प चुन सकती है। यदि दोनों नेता जानबूझकर अदालत में पेश नहीं होते हैं, तो अदालत उनके खिलाफ वारंट जैसे आदेश भी जारी कर सकती है। केजरीवाल ने जज के बच्चों के संबंध में हितों के टकराव का तर्क देते हुए कहा कि जज के बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन काम करते हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठता है।
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इस मामले का परिणाम दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है, विशेषकर आम आदमी पार्टी के लिए।
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