उत्तराखंड में यूजेवीएन की कालीगंगा-2 परियोजना की टैरिफ याचिका खारिज, उपभोक्ताओं पर नहीं बढ़ेगा बोझ
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उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने यूजेवीएन लिमिटेड की कालीगंगा-2 जल विद्युत परियोजना की टैरिफ याचिका को खारिज कर दिया है। कंपनी ने समयसीमा का उल्लंघन किया और 270 दिन की देरी से याचिका दायर की। इससे उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
- 01यूजेवीएन की कालीगंगा-2 परियोजना की टैरिफ याचिका खारिज की गई।
- 02कंपनी ने 270 दिन की देरी से याचिका दाखिल की।
- 03आयोग ने कंपनी के सभी तर्कों को खारिज किया।
- 04परियोजना को अब प्रोजेक्ट-विशिष्ट टैरिफ का लाभ नहीं मिलेगा।
- 05उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
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उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने यूजेवीएन लिमिटेड की 4.5 मेगावाट क्षमता की कालीगंगा-2 लघु जल विद्युत परियोजना के लिए दायर टैरिफ याचिका को खारिज कर दिया है। आयोग ने कहा कि कंपनी ने निर्धारित समयसीमा का उल्लंघन किया और 270 दिन की देरी से याचिका प्रस्तुत की। यूजेवीएन ने देरी के पीछे विभिन्न कारण बताए, जैसे पुराने रिकॉर्ड सिस्टम में दिक्कतें और स्टाफ में बदलाव। हालांकि, आयोग ने इन सभी तर्कों को अस्वीकार करते हुए कहा कि ये कंपनी के आंतरिक प्रबंधन से जुड़े मुद्दे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि अब इस परियोजना को प्रोजेक्ट-विशिष्ट टैरिफ का लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि 6.33 प्रति यूनिट का जेनेरिक टैरिफ लागू रहेगा। इससे उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
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इस निर्णय से उपभोक्ताओं को बिजली की कीमतों में वृद्धि का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनके वित्तीय बोझ में कमी आएगी।
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