हिमाचल प्रदेश में निर्विरोध पंचायतों की प्रोत्साहन राशि में 125 गुना वृद्धि
Himachal: प्रदेश में तीस साल में 125 गुना बढ़ी निर्विरोध पंचायतों की प्रोत्साहन राशि, जानें कब हुई थी शुरुआत
Amar Ujala
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हिमाचल प्रदेश में निर्विरोध पंचायतों के लिए प्रोत्साहन राशि पिछले 30 वर्षों में 125 गुना बढ़कर 638 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। 1995 में राज्य निर्वाचन आयोग के गठन के बाद से 735 ग्राम पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं, जिससे चुनावी खर्च और विवाद कम हुए हैं।
- 01निर्विरोध पंचायतों के लिए प्रोत्साहन राशि 125 गुना बढ़ी है।
- 02अब तक 638 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।
- 03735 ग्राम पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं।
- 041995 में राज्य निर्वाचन आयोग का गठन हुआ।
- 05निर्विरोध चुनाव से सामाजिक सौहार्द बढ़ता है।
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हिमाचल प्रदेश में निर्विरोध पंचायतों के लिए प्रोत्साहन राशि पिछले 30 वर्षों में 125 गुना बढ़कर 638 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। राज्य में अब तक 735 ग्राम पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर सहमति नहीं बन पाई है। 1995 में राज्य निर्वाचन आयोग के गठन के बाद से पंचायत चुनावों में पारदर्शिता आई है। पहले पंचायत प्रतिनिधियों का चयन पारंपरिक तरीकों से होता था। वर्तमान में, निर्विरोध चुनावों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि को समय-समय पर बढ़ाया गया है। 1995 में यह राशि 20 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर कई करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। सरकार का मानना है कि निर्विरोध चुनाव से चुनावी खर्च और विवाद कम होते हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द बढ़ता है।
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निर्विरोध चुनावों से पंचायतों में विकास कार्यों और सामुदायिक परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय निवासियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
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