कोयले के उपयोग से भारत ने बचाए ₹28,000 करोड़, LNG संकट के बीच बढ़ी मांग
कोयले ने बचाए भारत के ₹28000 करोड़, LNG संकट के बीच डर्टी फ्यूल बना फैक्ट्रियों की संजीवनी

Image: Jagran
भारत ने कोयले के उपयोग से ₹28,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है, जबकि LNG संकट के चलते इसकी मांग बढ़ी है। कोल गैसीफिकेशन तकनीक से कोयले का उपयोग उद्योगों में किया जा रहा है, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ रही है।
- 01भारत ने कोयले के उपयोग से ₹28,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है।
- 02कोल गैसीफिकेशन तकनीक से कोयले का उपयोग बढ़ा है।
- 03भारत के पास 200 साल का कोयले का भंडार है।
- 04सरकार ने 2021 में राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन शुरू किया था।
- 05कोयले का उपयोग अब उद्योगों में ऊर्जा संकट के समाधान के लिए किया जा रहा है।
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भारत ने हाल ही में कोयले के उपयोग से ₹28,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है, खासकर जब LNG संकट के कारण ऊर्जा की आपूर्ति में समस्या उत्पन्न हुई है। कोयले को 'डर्टी फ्यूल' माना जाता था, लेकिन अब कोल गैसीफिकेशन तकनीक के माध्यम से इसे उद्योगों में ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा कोयले का भंडार है, जो अगले 200 वर्षों की जरूरतों को पूरा कर सकता है। सरकार ने 2021 में राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन की शुरुआत की थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले का गैसीकरण करना है। इस पहल से भारत ने आयातित तेल और अन्य ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की है। कोयला अब न केवल उद्योगों को चलाने में मदद कर रहा है, बल्कि यह देश की आर्थिक स्थिरता में भी योगदान दे रहा है।
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कोयले के उपयोग से उद्योगों की ऊर्जा आपूर्ति में सुधार हुआ है और विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
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