कर्नाटक के इंजीनियर ने 1.48 करोड़ में अपने बचपन के स्कूल का कायाकल्प किया
बचपन के सरकारी स्कूल की बदहाली देख रो दिया इंजीनियर, 1.48 करोड़ देकर बनवाई नई बिल्डिंग

Image: News 18 Hindi
कर्नाटक के मांड्या जिले के कट्टाराघट्टा गांव के रिटायर्ड इंजीनियर केपी शिवकुमार ने अपने बचपन के सरकारी स्कूल की जर्जर हालत देखकर अपनी कमाई से ₹1.48 करोड़ खर्च कर एक नई बिल्डिंग बनवाई। यह कदम गांव के बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है।
- 01केपी शिवकुमार ने अपने बचपन के सरकारी स्कूल की हालत देखकर ₹1.48 करोड़ खर्च कर नई बिल्डिंग बनवाई।
- 02स्कूल की पुरानी इमारत जर्जर और असुरक्षित हो चुकी थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
- 03नए स्कूल में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जो आमतौर पर महंगे प्राइवेट स्कूलों में मिलती हैं।
- 04शिवकुमार का यह कदम अन्य सफल लोगों के लिए प्रेरणा है कि वे अपने गांवों के विकास में योगदान दें।
- 05शिवकुमार ने सरकारी मदद के बिना अपने बलबूते पर यह कार्य किया, जिससे यह साबित होता है कि सकारात्मक बदलाव के लिए केवल इरादा चाहिए।
Advertisement
In-Article Ad
कर्नाटक के मांड्या जिले के कट्टाराघट्टा गांव के रिटायर्ड इंजीनियर केपी शिवकुमार ने अपने बचपन के सरकारी स्कूल की जर्जर स्थिति को देखकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई से ₹1.48 करोड़ खर्च कर स्कूल की नई बिल्डिंग बनवाई। यह स्कूल, जहां उन्होंने खुद पढ़ाई की थी, अब पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुका था, जिससे बच्चों की पढ़ाई में कठिनाई और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा था। शिवकुमार ने अपने बचपन की यादों को ताजा करते हुए यह निर्णय लिया कि अगर यह स्कूल बंद हो गया, तो गांव के गरीब बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। उन्होंने सरकारी मदद की प्रतीक्षा किए बिना, स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से एक आधुनिक स्कूल तैयार करवाया, जिसमें प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उनका यह कार्य न केवल बच्चों के लिए एक नया अवसर प्रदान करता है, बल्कि अन्य सफल लोगों को भी प्रेरित करता है कि वे अपने गांवों के विकास में योगदान दें।
Advertisement
In-Article Ad
शिवकुमार के इस कदम से गांव के बच्चों को एक सुरक्षित और आधुनिक शिक्षा का अवसर मिलेगा।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आप अपने बचपन के स्कूल के विकास में योगदान देने के लिए तैयार हैं?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।



