हाईकोर्ट का फैसला: पत्नी शिक्षित होने पर भी पति की भरण-पोषण की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती
High Court : पत्नी शिक्षित है तो भी पति भरण-पोषण की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता, हाईकोर्ट का अहम फैसला
Amar Ujala
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पति को पत्नी की शिक्षा या आय के आधार पर भरण-पोषण से मुक्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने पति की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए भरण-पोषण की राशि को पुनर्निर्धारित करने का आदेश दिया है।
- 01पति की भरण-पोषण से मुक्ति का दावा खारिज किया गया।
- 02अदालत ने पति की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा।
- 03भरण-पोषण की नई राशि छह महीने में तय की जाएगी।
- 04सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में देरी पर अधिकारियों को निर्देश।
- 05याचिकाकर्ता को तीन महीने में निर्णय लेने का आदेश।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक मामले में पति के भरण-पोषण से संबंधित दावों को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि पति, जो अहमदाबाद में एक व्यवसाय चलाता है और कनाडा से उच्च शिक्षा प्राप्त है, ने आयकर रिटर्न में विरोधाभासी जानकारियां दी हैं। अदालत ने कहा कि पत्नी की शिक्षा या पिछली कमाई के आधार पर भरण-पोषण से इन्कार नहीं किया जा सकता। अदालत ने पति को निर्देश दिया है कि वह पिछले आदेश के अनुसार सभी बकाया राशि का भुगतान करे और पारिवारिक न्यायालय को छह महीने के भीतर भरण-पोषण की नई राशि तय करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने झांसी की नगर पालिका परिषद से सेवानिवृत्त कर्मचारी अर्चना की याचिका पर संबंधित अधिकारियों को तीन महीने के भीतर वित्तीय लाभों के भुगतान का निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
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इस निर्णय से पति-पत्नी के बीच भरण-पोषण के मामलों में न्याय सुनिश्चित होगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर पत्नियों को सहायता मिलेगी।
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