दिल्ली शराब नीति केस में जस्टिस स्वर्ण कांता का अलग होना, केजरीवाल ने कहा - सत्य की जीत
शराब नीति केस से अलग हुईं जस्टिस स्वर्णकांता, केजरीवाल ने कहा - सत्य की जीत हुई
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दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने शराब नीति केस से खुद को अलग कर लिया है, जिसके बाद अरविंद केजरीवाल ने इसे 'सत्य की जीत' बताया। जस्टिस शर्मा ने अवमानना कार्यवाही शुरू की थी, जिसमें केजरीवाल और अन्य आप नेताओं का नाम शामिल है।
- 01जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने शराब नीति केस से खुद को अलग किया।
- 02अरविंद केजरीवाल ने इसे 'सत्य की जीत' बताया।
- 03जज ने अवमानना कार्यवाही शुरू की, जिसमें कई आप नेता शामिल हैं।
- 04जस्टिस शर्मा ने कहा कि यह निर्णय न्यायपालिका की रक्षा के लिए है।
- 05सोशल मीडिया पर आप नेताओं के खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाया गया।
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दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आज शराब नीति केस से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय अवमानना कार्यवाही के चलते लिया गया है, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अन्य नेताओं का नाम शामिल है। जस्टिस शर्मा ने कहा कि जब किसी संस्था को कटघरे में खड़ा किया जाता है, तो न्यायाधीश का कर्तव्य बनता है कि वह अदालत के खिलाफ आरोपों से प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर चलाए गए वीडियो और अभियानों के जरिए न्यायपालिका को अस्थिर करने की कोशिश की गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, अरविंद केजरीवाल ने इसे 'सत्य की जीत' बताया और गांधी जी के सत्याग्रह की जीत के रूप में पेश किया। जस्टिस शर्मा ने कहा कि अदालत की कार्यवाही के दौरान बाहरी दबाव और दुष्प्रचार के खिलाफ यह कदम उठाया गया है।
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इस निर्णय से आम आदमी पार्टी के नेताओं पर अवमानना कार्यवाही का प्रभाव पड़ेगा, जो उनकी राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
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