उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष का हलाला प्रथा पर सख्त बयान
देहरादून में उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष का बयान, हलाला महिलाओं के सम्मान के खिलाफ
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उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने हलाला प्रथा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए समर्थन की बात की, साथ ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने को महिलाओं के लिए सकारात्मक कदम बताया।
- 01फरजाना बेगम ने हलाला प्रथा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
- 02उन्होंने पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
- 03यूसीसी के लागू होने से महिलाओं में विश्वास बढ़ा है।
- 04हलाला जैसी कुप्रथा महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है।
- 05समाज को हलाला प्रथा के खिलाफ खुलकर सामने आना चाहिए।
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उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने हलाला प्रथा के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि वह पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए उनके घर जाएंगी। उन्होंने बताया कि हलाला प्रथा महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ है और इस पर खुलकर बात करने की आवश्यकता है। फरजाना ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने को महिलाओं के हित में एक बड़ा कदम बताया, जिससे महिलाएं अब न्याय की लड़ाई लड़ने में सक्षम हो रही हैं। उन्होंने पीड़िता द्वारा मुकदमा दर्ज कराने को साहसिक कदम बताया और पुलिस एवं प्रशासन की कार्रवाई की सराहना की। उनका मानना है कि समाज को हलाला प्रथा के खिलाफ खुलकर सामने आना चाहिए, ताकि किसी भी महिला को ऐसी कुप्रथाओं का सामना न करना पड़े।
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यह बयान महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और हलाला प्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा।
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