चुनाव आयोग ने 'संदिग्ध विदेशी नागरिकों' के मामलों को साझा करने का निर्देश दिया
मतदाता सूची पुनरीक्षण: 'संदिग्ध विदेशियों' का विवरण अधिकारियों के साथ साझा करेगा चुनाव आयोग

Image: Jagran
भारत के निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 'संदिग्ध विदेशी नागरिकों' के मामलों को सक्षम अधिकारियों के साथ साझा करने का निर्देश दिया है। यह प्रक्रिया 14 मई को जारी निर्देशों के अनुसार होगी।
- 01निर्वाचन आयोग ने 'संदिग्ध विदेशी नागरिकों' के मामलों को साझा करने का निर्देश दिया है।
- 02बूथ स्तरीय अधिकारी अनुपस्थिति, स्थानांतरण, मृत्यु और दोहरी प्रविष्टि के कारणों की पहचान करेंगे।
- 03संदिग्ध नागरिकों के मामलों को नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भेजा जाएगा।
- 04पिछले साल के एसआइआर में बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार के नागरिकों का पता लगाया गया था।
- 05विपक्ष ने इस प्रक्रिया को भाजपा के विरोधी मतदाताओं को निशाना बनाने की चाल बताया।
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भारत के निर्वाचन आयोग ने अपने राज्य स्तरीय चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान 'संदिग्ध विदेशी नागरिकों' के मामलों को सक्षम अधिकारियों के साथ साझा किया जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के गणना प्रपत्र वापस नहीं आए हैं, उनके लिए बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) अनुपस्थिति, स्थानांतरण, मृत्यु और दोहरी प्रविष्टि जैसे संभावित कारणों की पहचान करेंगे। 14 मई को जारी निर्देशों में कहा गया है कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) संदिग्ध विदेशी नागरिकों के मामलों को नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत सक्षम अधिकारियों को भेजेंगे। पिछले वर्ष, जब चुनाव आयोग ने बिहार में एसआइआर की तैयारी की थी, तब जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार के नागरिकों का पता लगाया था, लेकिन आयोग ने इस बारे में कोई संख्या या सबूत साझा नहीं किया। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को भाजपा और उसके सहयोगियों के विरोधियों को निशाना बनाने की एक चाल करार दिया है।
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यह प्रक्रिया संभावित रूप से मतदाता पहचान और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
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