भारत में ऊर्जा संकट के बीच तेल और गैस की आपूर्ति में सुधार
रूस ने तेल तो अमेरिका ने खूब दी LPG, देश में अब पेट्रोल-डीजल और गैस की नहीं होगी कमी
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भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अपनी आपूर्ति श्रृंखला को विविधता दी है। मई 2026 में कच्चे तेल का आयात 10% बढ़कर 49 लाख बैरल प्रति दिन हो गया, जिसमें रूस की हिस्सेदारी 38.60% रही। अमेरिका से एलपीजी और LNG की आपूर्ति में भी वृद्धि हुई है।
- 01भारत का कच्चा तेल आयात मई में 49 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुँच गया, जो पिछले महीने की तुलना में 10% अधिक है।
- 02रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा, जिसका आयात 19 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुँच गया।
- 03अमेरिका से एलपीजी का आयात 11% बढ़कर 10.8 लाख टन हो गया, जिसमें आधी मात्रा अमेरिका से आई।
- 04भारत का LNG आयात भी अमेरिका पर निर्भर हो गया, जो कुल गैस आयात का 38% है।
- 05कतर से गैस आयात में कमी आई, जो अब 'जीरो' पर है।
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पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद, भारत ने अपने ऊर्जा संकट को संभालने के लिए एक प्रभावी रणनीति अपनाई है। मई 2026 में भारत का कच्चा तेल आयात 10% बढ़कर 49 लाख बैरल प्रति दिन हो गया, जिसमें रूस की हिस्सेदारी 38.60% रही। रूस से कच्चे तेल का आयात 19 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुँच गया, जो जनवरी की तुलना में लगभग 80% अधिक है। इसके अलावा, अमेरिका से एलपीजी का आयात 11% बढ़कर 10.8 लाख टन हो गया, जिसमें अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बन गया है। LNG के मामले में भी भारत की निर्भरता अमेरिका पर बढ़ गई है, जो कुल गैस आयात का 38% है। कतर, जो पारंपरिक रूप से भारत का सबसे बड़ा गैस पार्टनर रहा है, अब 'जीरो' पर पहुँच गया है। इन उपायों के चलते, भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं होगी।
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भारत की ऊर्जा सुरक्षा में सुधार से आम नागरिकों को पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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