दिशाशूल: यात्रा से पहले जानें दिशाओं के शुभ-अशुभ प्रभाव
Disha Shool: यात्रा पर निकलने से पहले क्यों जानना चाहिए दिशाशूल? जानें इससे जुड़े सभी नियम और उपाय
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दिशाशूल का अर्थ है यात्रा के समय शुभ और अशुभ दिशाओं का ज्ञान। ज्योतिष के अनुसार, विभिन्न दिनों में दिशाशूल अलग-अलग दिशाओं में होता है, जिससे यात्रा में बाधाएं आ सकती हैं। उपायों के माध्यम से इन बाधाओं से बचा जा सकता है।
- 01दिशाशूल का अर्थ यात्रा के समय शुभ और अशुभ दिशाओं का ज्ञान है।
- 02सोमवार को पूर्व दिशा, मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा, गुरुवार को दक्षिण दिशा, शुक्रवार को पश्चिम दिशा, और शनिवार को फिर पूर्व दिशा में दिशाशूल होता है।
- 03प्रत्येक दिन के लिए विशेष उपाय हैं, जैसे सोमवार को आईना देखना या दूध पीना।
- 04दिशाशूल से बचने के लिए विभिन्न खाद्य पदार्थों का सेवन करना आवश्यक है।
- 05यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है और ज्योतिष में विश्वास रखने वालों के लिए उपयोगी है।
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दिशाशूल का महत्व भारतीय ज्योतिष में विशेष रूप से यात्रा के समय महत्वपूर्ण होता है। यह दर्शाता है कि किस दिशा में जाने पर कार्य में बाधा आ सकती है। प्रत्येक दिन के लिए दिशाशूल विभिन्न दिशाओं में होता है। उदाहरण के लिए, सोमवार को पूर्व दिशा में, मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा में, गुरुवार को दक्षिण दिशा में, शुक्रवार को पश्चिम दिशा में, और शनिवार को पुनः पूर्व दिशा में दिशाशूल होता है। इन दिशाओं से बचने के लिए विशेष उपाय भी बताए गए हैं, जैसे सोमवार को आईना देखकर या दूध पीकर निकलना, मंगलवार को गुड़ खाना, और शुक्रवार को जौ के दाने खाना। यह जानकारी ज्योतिष के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण है।
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