जम्मू-कश्मीर में 12.8% स्कूलों में अब भी बिजली की कमी, डिजिटल शिक्षा पर प्रभाव
जम्मू-कश्मीर के 12% से अधिक स्कूलों में अब भी बिजली नहीं, डिजिटल शिक्षा पर असर
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जम्मू-कश्मीर में 12.8% स्कूलों में अब भी बिजली की सुविधा नहीं है, जिससे डिजिटल शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। 2014-15 में केवल 25.1% स्कूलों में बिजली थी, जो 2024-25 में बढ़कर 87.2% हो गई है, लेकिन यह राष्ट्रीय स्तर पर पीछे है।
- 01जम्मू-कश्मीर के 12.8% स्कूलों में अब भी बिजली की कमी है।
- 022014-15 में केवल 25.1% स्कूलों में बिजली थी, जो 2024-25 में 87.2% हो गई है।
- 03बिजली की कमी से डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास का संचालन प्रभावित हो रहा है।
- 04पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है।
- 05सरकार ने स्थिति में सुधार के लिए प्रयास किए हैं, लेकिन अंतिम चरण पूरा नहीं हुआ है।
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जम्मू-कश्मीर में शिक्षा संबंधी एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 12.8% स्कूलों में अब भी बिजली की सुविधा नहीं है, जिससे डिजिटल शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। वर्ष 2014-15 में केवल 25.1% स्कूलों में बिजली थी, जो 2024-25 में बढ़कर 87.2% हो गई है। हालांकि, यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर अन्य राज्यों की तुलना में कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने में कठिनाई आ रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हरियाणा, गोवा और दिल्ली जैसे राज्यों में स्कूलों में बिजली की सुविधा शत-प्रतिशत हो चुकी है। सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण योजनाओं और शिक्षा ढांचे में निवेश के जरिए स्थिति में सुधार किया है, लेकिन अंतिम चरण तक पहुंचना बाकी है।
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बिजली की कमी से बच्चों की पढ़ाई और डिजिटल शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे भविष्य में उनकी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
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