कानपुर में फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़, 12वीं पास डिलीवरी मास्टर गिरफ्तार
सीलबंद पैकेट, मोटी रकम और घर-घर... 12वीं पास निकला फर्जी डिग्री रैकेट का डिलीवरी मास्टर, ऐसे चलता था पूरा खेल

Image: News 18 Hindi
कानपुर, उत्तर प्रदेश में एक बड़ा फर्जी डिग्री रैकेट उजागर हुआ है, जिसमें 98 विश्वविद्यालयों से संपर्क कर डिग्रियां और प्रमाणपत्र वितरित किए जा रहे थे। गिरोह के सदस्य राघव सर्राफ को गिरफ्तार किया गया है, जो पिछले छह साल से इस नेटवर्क से जुड़ा था और विभिन्न स्थानों पर डिग्रियां डिलीवर कर रहा था।
- 01गिरोह के सरगना डॉ. मनीष कुमार के भांजे राघव सर्राफ को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी डिग्रियों की डिलीवरी करता था।
- 02राघव ने बताया कि उसे हाईस्कूल से ग्रेजुएशन तक की मार्कशीट पर ₹10,000 और माइग्रेशन सर्टिफिकेट पर ₹15,000 मिलते थे।
- 03गिरोह ने 65 डिग्रियां विभिन्न स्थानों पर वितरित की हैं, जिनमें दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा शामिल हैं।
- 04डॉ. मनीष ने 2022 में लंदन की संस्था से फ्रेंचाइजी लेने का प्रयास किया था, जिसे खारिज कर दिया गया।
- 05पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की है और उन्हें पकड़ने के लिए टीमों को विभिन्न प्रदेशों में भेजा गया है।
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कानपुर, उत्तर प्रदेश में एक बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें गिरोह के सदस्य राघव सर्राफ को गिरफ्तार किया गया है। राघव, जो 12वीं पास है, पिछले छह साल से इस गिरोह से जुड़ा हुआ था और विभिन्न शहरों में डिग्रियां डिलीवर करता था। पुलिस ने बताया कि गिरोह ने 98 विश्वविद्यालयों से संपर्क कर फर्जी मार्कशीट, डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार किए थे। राघव ने बताया कि उसे हाईस्कूल से ग्रेजुएशन तक की मार्कशीट पर ₹10,000 और माइग्रेशन सर्टिफिकेट पर ₹15,000 मिलते थे। गिरोह के सरगना डॉ. मनीष कुमार ने 2022 में लंदन की एक संस्था से फ्रेंचाइजी लेने का प्रयास किया था, जिसे खारिज कर दिया गया था। पुलिस ने अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है और अन्य सदस्यों की पहचान के लिए छापेमारी जारी है। जॉइंट पुलिस कमिश्नर संकल्प शर्मा ने कहा कि गिरोह के अन्य सदस्यों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।
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यह रैकेट शिक्षा क्षेत्र में धोखाधड़ी का एक बड़ा उदाहरण है, जो छात्रों को गलत तरीके से डिग्रियां प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।
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